भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तमिलनाडु में AIADMK और DMK दोनों सरकारों ने SC/ST छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया। इस प्रशासनिक विफलता के कारण 2017 से 2023 के बीच हजारों योग्य छात्र वित्तीय सहायता से वंचित रह गए।
- कैग रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु की तत्कालीन AIADMK और शुरुआती DMK सरकारें SC/ST छात्रवृत्ति योजनाओं का प्रचार करने में विफल रहीं।
- 2019 से 2023 के बीच, पात्र अनुसूचित जाति (SC) के 52% और अनुसूचित जनजाति (ST) के 55% तक छात्र योजनाओं के लाभ से वंचित रहे।
- निजी कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटे के तहत प्रवेश में पारदर्शिता की कमी और छात्रवृत्ति राशि के भुगतान में देरी ने संकट को और बढ़ा दिया।
तमिलनाडु में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ईसाई धर्म में परिवर्तित अनुसूचित जाति (SCC) के छात्रों के लिए शैक्षिक छात्रवृत्ति योजनाओं पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली पिछली AIADMK सरकार और एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार अपने शुरुआती वर्षों में इन जनकल्याणकारी योजनाओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार करने में पूरी तरह विफल रहीं। इसके परिणामस्वरूप हजारों पात्र छात्र वित्तीय सहायता पाने से वंचित रह गए।
यह ऑडिट रिपोर्ट साल 2017 से 2023 तक की अवधि को कवर करती है। कैग ने पाया कि वर्ष 2019-22 के दौरान, आठ नमूना जिलों के औसतन 46% स्कूलों ने प्री-मैट्रिक और 39% स्कूलों ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ ही नहीं उठाया। इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद छात्रों के भविष्य पर पड़ा, जो वित्तीय सहायता के अभाव में पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष करते रहे।
रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। 2019-23 के दौरान, प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाओं के तहत संभावित रूप से पात्र SC छात्रों का गैर-कवरेज क्रमशः 21% से 52% और 20% से 29% के बीच रहा। इसी तरह, पात्र ST छात्रों के लिए यह आंकड़ा क्रमशः 35% से 55% (प्री-मैट्रिक) और 30% से 42% (पोस्ट-मैट्रिक) के बीच रहा। यह दर्शाता है कि आधे से अधिक जरूरतमंद छात्र सरकारी सहायता से पूरी तरह दूर रहे।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हाशिए पर मौजूद समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में प्रशासनिक उदासीनता एक पीढ़ीगत शैक्षिक अंतर पैदा करती है। जब नौकरशाही की अक्षमता के कारण वित्तीय सहायता रुकती है, तो इसका सीधा असर राज्य के साक्षरता लक्ष्यों और सामाजिक गतिशीलता सूचकांक पर पड़ता है। सामाजिक न्याय का दावा करने वाली सरकारों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है।
"कल्याणकारी नीतियां केवल कागजों पर अच्छी नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनका जमीनी क्रियान्वयन भी उतना ही मजबूत होना चाहिए। समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए छात्रवृत्ति का प्रचार न करना सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।"
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2017-22 के दौरान, प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृत होने वाले 2,901 छात्र अगले वर्ष स्कूल छोड़ गए या उन्हें योजना से बाहर कर दिया गया। इसके अलावा, निजी संस्थानों में मैनेजमेंट कोटे के तहत दाखिले की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मनमानी देखी गई, जिसके कारण अपात्र छात्रों को भी गलत तरीके से छात्रवृत्ति का लाभ मिल गया।
छात्रवृत्ति राशि के भुगतान में भारी देरी भी एक बड़ी समस्या रही। साल 2017-23 के बीच, 36,510 मामलों में छात्रवृत्ति के भुगतान में एक महीने से लेकर एक साल से अधिक की देरी हुई, जिससे कुल ₹7.28 करोड़ का भुगतान प्रभावित हुआ। इसके अलावा, बैंक खाते ब्लॉक होने या बंद होने के कारण ₹1.61 करोड़ की राशि लाभार्थियों के खातों में जमा ही नहीं हो सकी और वापस लौट गई।
ऐतिहासिक रूप से, तमिलनाडु सामाजिक कल्याण और सकारात्मक कार्रवाई (आरक्षण) के मामलों में देश का अग्रणी राज्य रहा है। हालांकि, कागजी दस्तावेजों से डिजिटल स्कॉलरशिप पोर्टल्स पर जाने की प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियानों की कमी के कारण एक बड़ा प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया, जिसे दूर करने में लगातार आई सरकारें नाकाम रहीं।
| श्रेणी (Category) | प्री-मैट्रिक गैर-कवरेज सीमा (Pre-Matric Non-Coverage) | पोस्ट-मैट्रिक गैर-कवरेज सीमा (Post-Matric Non-Coverage) |
|---|---|---|
| अनुसूचित जाति (SC) | 21% - 52% | 20% - 29% |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 35% - 55% | 30% - 42% |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कैग रिपोर्ट के अनुसार छात्रवृत्ति योजनाएं विफल क्यों हुईं?
उत्तर: मुख्य कारणों में सरकारों द्वारा योजनाओं का अपर्याप्त प्रचार-प्रसार, आय और समुदाय प्रमाणपत्रों की कमी (28% मामलों में), और छात्रवृत्ति के भुगतान में अत्यधिक देरी शामिल हैं।
प्रश्न 2: कैग ने सुधार के लिए क्या सिफारिशें की हैं?
उत्तर: कैग ने सिफारिश की है कि सरकार को प्रचार उपायों को तेज करना चाहिए, सबसे गरीब परिवारों से पात्र छात्रों की पहचान करनी चाहिए, और छात्रवृत्ति राशि समय पर जारी करनी चाहिए।