कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जाति जनगणना में जानबूझकर खामियां छोड़ने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश ने कहा कि ओपन-एंडेड सवालों के कारण डेटा गलत होगा, जिससे सामाजिक न्याय का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।

  • कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ओपन-एंडेड प्रश्नों का उपयोग डेटा को दूषित करने के लिए किया जा रहा है।
  • पार्टी ने मांग की है कि बिहार और तेलंगाना की तरह एक प्रमाणित जाति सूची (Certified List) का उपयोग किया जाए।
  • मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है, जिसका जवाब अभी प्रतीक्षित है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जाति जनगणना की पूरी प्रक्रिया को विफल करना चाहते हैं। कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि वर्तमान जनगणना प्रारूप में 'ड्रॉप-डाउन लिस्ट' के बजाय 'ओपन-एंडेड' (खुले) प्रश्नों का उपयोग करना एक बहुत ही गंभीर तकनीकी खामी है।

कांग्रेस का तर्क है कि जब लोग अपनी जाति का नाम खुद लिखेंगे, तो एक ही जाति के लिए अलग-अलग नाम, उप-जातियां और वर्तनी (spellings) दर्ज होंगी। इससे डेटा का विश्लेषण करना असंभव हो जाएगा और अंततः पूरी गणना प्रक्रिया अर्थहीन साबित होगी। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि सही सवाल ही सही डेटा देंगे, और सही डेटा से ही सामाजिक न्याय और संसाधनों का सही वितरण सुनिश्चित हो सकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह विवाद केवल तकनीकी नहीं बल्कि गहरा राजनीतिक है। यदि जाति जनगणना का डेटा सटीक नहीं निकलता, तो सरकार आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण के दावों को चुनौती दे सकती है। कांग्रेस इसे OBC और EBC समुदायों के वास्तविक प्रतिनिधित्व को दबाने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रही है।

"डेटा की शुद्धता के बिना सामाजिक न्याय केवल एक राजनीतिक नारा बनकर रह जाएगा; जाति जनगणना के लिए वैज्ञानिक पद्धति अनिवार्य है।"

कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए पिछले चार दिनों में देश भर में 17 प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की हैं। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सरकार जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न कर रही है ताकि पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या सामने न आ सके।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को एक औपचारिक पत्र लिखा था। इस पत्र में मांग की गई थी कि वर्तमान प्रश्नावली को पूरी तरह scrapped (निरस्त) किया जाए और विशेषज्ञों तथा राजनीतिक दलों के परामर्श से एक नई, प्रमाणित सूची आधारित प्रश्नावली तैयार की जाए।

विशेषता वर्तमान प्रस्तावित तरीका (केंद्र) कांग्रेस की मांग (प्रमाणित तरीका)
प्रश्न प्रारूप ओपन-एंडेड (स्व-लिखित) ड्रॉप-डाउन/प्रमाणित सूची
डेटा सटीकता वर्तनी की गलतियों की संभावना अधिक उच्च सटीकता और मानकीकरण
मॉडल अपरिभाषित बिहार और तेलंगाना मॉडल
क्या आप जानते हैं?: बिहार ने हाल ही में अपना जाति आधारित सर्वेक्षण पूरा किया है, जिसने देश में जाति जनगणना की बहस को फिर से तेज कर दिया है।

Frequently Asked Questions

1. ओपन-एंडेड प्रश्न जाति जनगणना में समस्या क्यों पैदा करते हैं?
क्योंकि लोग एक ही जाति को अलग-अलग नामों या गलत स्पेलिंग के साथ लिख सकते हैं, जिससे कंप्यूटर आधारित गणना में त्रुटियां आती हैं।

2. कांग्रेस ने किस मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया है?
कांग्रेस ने तेलंगाना और बिहार में किए गए जाति सर्वेक्षणों की तर्ज पर एक पूर्व-तैयार और प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना करने की मांग की है।