तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने मेयर वी.वी. राजेश पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'मेयर केयर' पहल में भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान हटाने के लिए सिनेमाघरों में अधिक कीमत वसूलने का मुद्दा उठाया है।

  • LDF ने मेयर वी.वी. राजेश पर भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।
  • विवाद 'मेयर केयर' किट को लेकर है, जिसे निजी दान के माध्यम से कर्मचारियों और पार्षदों को बांटा गया।
  • विपक्ष का दावा है कि मेयर कचरा प्रबंधन और पानी की कमी जैसे गंभीर मुद्दों की अनदेखी कर रहे हैं।

तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में राजनीतिक माहौल गरमा गया है क्योंकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने मेयर वी.वी. राजेश पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का दावा है कि सिनेमाघरों में खाद्य पदार्थों की अधिक कीमतों के खिलाफ मेयर का हालिया अभियान एक सोची-समझी रणनीति है, ताकि उन्हें वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों से बचाया जा सके।

इस विवाद के केंद्र में 'मेयर केयर' पहल है। LDF संसदीय दल के नेता एस.पी. दीपक के अनुसार, मेयर ने शहर के प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से लाखों रुपये के उपहार और दान लेकर अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। इन उपहारों को उन निगम कर्मचारियों और पार्षदों के बीच वितरित किया गया, जो पहले से ही सार्वजनिक सेवक हैं और जिनमें से कई का वेतन काफी अधिक है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष स्थानीय शासन के भीतर एक गहरी प्रणालीगत समस्या को उजागर करता है, जहाँ 'परोपकारी' पहलों का उपयोग अक्सर सार्वजनिक अधिकारियों और निजी व्यवसायों के बीच गुप्त समझौतों के लिए किया जाता है। पॉपकॉर्न की कीमत पर ध्यान केंद्रित करके, प्रशासन पर आरोप है कि वह संस्थागत भ्रष्टाचार के प्रति जवाबदेही से बचने के लिए शासन का उपहास कर रहा है।

श्री दीपक ने मेयर की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विडंबना है कि एक नेता जो ईंधन की कीमतों, NEET परीक्षा की अनियमितताओं और सांप्रदायिक तनाव जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप रहता है, वह अचानक सिनेमाघरों में उपभोक्ता अधिकारों का मसीहा बन गया है। LDF का तर्क है कि यह चयनात्मक सक्रियता जांच से बचने का एक तरीका है।

शहरी बुनियादी ढांचे के प्रबंधन से हटकर सिनेमा स्नैक्स की निगरानी करना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जांच के बीच नैरेटिव को नियंत्रित करने की हताश कोशिश की जा रही है।

विपक्ष ने एक विशिष्ट मामले का भी उल्लेख किया जिसमें एक बड़ी कैटरिंग यूनिट ने 4,000 लोगों के लिए कॉर्पोरेशन के 'ओणसद्य' को प्रायोजित किया था। अतीत में, ऐसे आयोजन कर्मचारियों और पार्षदों के सामूहिक योगदान से होते थे। LDF अब सरकार और सतर्कता विभाग से मांग कर रहा है कि इस प्रायोजन के बदले में कैटरिंग फर्म को दिए गए किसी भी अवैध लाभ की जांच की जाए।

इसके अलावा, LDF ने दावा किया कि थिएटर मालिकों के साथ मेयर की बैठक केवल एक दिखावा थी। आरोप है कि बैठक में बहुत कम थिएटर मालिक शामिल हुए, जबकि कमरा निगम अधिकारियों से भरा था ताकि जनता के बीच जुड़ाव का भ्रम पैदा किया जा सके। यह सब तब हो रहा है जब शहर पीने के पानी की कमी, कचरा समस्या, आवारा कुत्तों के आतंक और ट्रैफिक जाम जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।

क्या आप जानते हैं?: कई स्थानीय शासन नियमों के तहत, आधिकारिक स्टाफ लाभ के लिए निजी दान स्वीकार करना 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) या सार्वजनिक सेवकों के आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मेयर केयर' पहल क्या है?
यह एक कार्यक्रम है जिसके तहत निगम कर्मचारियों और पार्षदों को ओणम किट वितरित किए गए, जिन्हें कथित तौर पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से प्राप्त दान से वित्तपोषित किया गया था।

इस मामले में LDF की मुख्य शिकायतें क्या हैं?
LDF ने फंड संग्रह में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और दावा किया है कि मेयर कचरा और जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण नागरिक मुद्दों की अनदेखी कर रहे हैं।