राजकोट नगर निगम ने तीन महत्वपूर्ण फ्लाईओवरों के निर्माण में गंभीर खामियों और देरी के बाद दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। निरीक्षण में जंग लगा स्टील और घटिया निर्माण कार्य पाया गया है।
- राजकोट नगर निगम ने दो सिविल इंजीनियरों को निलंबित किया और दो वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
- निरीक्षण में पाया गया कि फ्लाईओवरों में जंग लगे स्टील का उपयोग किया गया और निर्माण गुणवत्ता बेहद खराब है।
- परियोजना जो 90% पूरी होनी चाहिए थी, वह वर्तमान में केवल 40% ही पूर्ण हुई है।
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के सबसे बड़े शहर राजकोट में बुनियादी ढांचे के निर्माण में एक बड़ा प्रशासनिक संकट सामने आया है। नगर आयुक्त तुषार सुमेरा के नेतृत्व में किए गए एक औचक निरीक्षण के बाद, शहर के तीन प्रमुख फ्लाईओवरों के निर्माण में गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। इसके परिणामस्वरूप, नागरिक निकाय ने तत्काल प्रभाव से दो इंजीनियरिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
यह मामला आरआर-2 (RR-2) के फेज-I के विस्तार से जुड़ा है, जो जामनगर रोड और कालावड रोड इंटरसेक्शन के बीच स्थित है। यहाँ तीन फ्लाईओवरों—BR-2, BR-3 और BR-4—का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 40 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसमें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और काम की गति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
लापरवाही का स्तर और तकनीकी खामियां
नगर आयुक्त तुषार सुमेरा ने 7 सितंबर को साइट का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पाया कि निर्माण में इस्तेमाल किया गया स्टील जंग खा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टील की प्लेसमेंट और स्पेसिंग में भी भारी त्रुटियां हैं, जो भविष्य में पुलों की संरचनात्मक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं। निलंबित अधिकारियों में वार्ड नंबर 9 के डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (सिविल) विजय सी करिया और वेस्ट जोन के असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) विशाल एम वगाडिया शामिल हैं।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के साथ एक खतरनाक समझौता है। जब करोड़ों रुपये के सरकारी फंड से बनने वाले पुलों में जंग लगे स्टील का उपयोग होता है, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन को जोखिम में डालता है। यह मामला ठेकेदारों और सरकारी निरीक्षकों के बीच संभावित सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
"बुनियादी ढांचे के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता करना एक आपराधिक लापरवाही है, क्योंकि यह भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।"
प्रशासन ने अब इस पूरे मामले की जांच सतर्कता विभाग (Vigilance Department) को सौंप दी है। जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि क्या घटिया निर्माण वाले हिस्सों को ध्वस्त कर दोबारा बनाना होगा। साथ ही, संबंधित ठेकेदार कंपनी को भी नोटिस जारी किया जा रहा है, क्योंकि वे टेंडर प्रोटोकॉल के अनुसार गुणवत्तापूर्ण कार्य देने के लिए बाध्य थे।
परियोजना की स्थिति: लक्ष्य बनाम वास्तविकता
| पैरामीटर | निर्धारित लक्ष्य (Target) | वास्तविक स्थिति (Actual) |
|---|---|---|
| निर्माण प्रगति | 90% पूर्ण | 40% पूर्ण |
| सामग्री गुणवत्ता | मानक स्टील | जंग लगा हुआ स्टील |
| समय सीमा | समयबद्ध पूर्णता | भारी विलंब |
Frequently Asked Questions
1. किन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है?
डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विजय सी करिया और असिस्टेंट इंजीनियर विशाल एम वगाडिया को निलंबित किया गया है।
2. इस मामले की आगे की जांच कौन करेगा?
राजकोट नगर निगम के सतर्कता विभाग (Vigilance Department) द्वारा विस्तृत जांच की जाएगी।