तेलंगाना विधानसभा में बीआरएस कार्यकर्ताओं द्वारा केसीआर के फार्महाउस की सड़क को 'शुद्ध' करने के विवाद पर भारी हंगामा हुआ। कांग्रेस ने इसे दलित विरोधी और मध्यकालीन मानसिकता करार देते हुए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है।

  • बीआरएस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दलित कार्यकर्ताओं के आने के बाद सड़क पर हल्दी और दूध छिड़का।
  • उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस कृत्य को 'मध्यकालीन' और अपमानजनक बताया।
  • कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर दलितों की सुरक्षा की मांग की।

तेलंगाना की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब बीआरएस (BRS) कार्यकर्ताओं द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता के. चंद्रशेखर राव (KCR) के एर्रावेली स्थित फार्महाउस की ओर जाने वाली सड़क का 'शुद्धिकरण' करने का वीडियो सामने आया। इस वीडियो में बीआरएस कार्यकर्ता पवनी गौड़ और अन्य लोगों को हल्दी और दूध छिड़कते देखा गया, जिन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के 'गुंडों' द्वारा सड़क को अपवित्र करने के बाद इसे शुद्ध किया जा रहा है।

इस घटना ने विधानसभा के भीतर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। सदन के सदस्यों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज को सदियों के सामाजिक सुधारों के बाद फिर से मध्य युग की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना केवल एक राजनीतिक झड़प नहीं है, बल्कि यह तेलंगाना के सामाजिक ताने-बाने में गहरी पैठी जातिगत संवेदनशीलता को उजागर करती है। जब किसी सार्वजनिक मार्ग का 'शुद्धिकरण' विशिष्ट समुदायों के आने के बाद किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर संवैधानिक समानता के अधिकार पर प्रहार है। यह विवाद आगामी चुनावों में दलित और पिछड़े वर्गों के ध्रुवीकरण का मुख्य केंद्र बन सकता है।

यह कृत्य न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह लोकतंत्र में मानवीय गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का खुला अपमान है।

सदन में हुई चर्चा के दौरान, अडलुरी लक्ष्मण, पोन्नम प्रभाकर और कोमटिरेड्डी वेंकट रेड्डी सहित कई मंत्रियों ने आरोप लगाया कि बीआरएस की कार्यप्रणाली में इस तरह की भेदभावपूर्ण मानसिकता रची-बसी है। उन्होंने कहा कि समाज अब इस तरह के अपमान को सहन नहीं करेगा।

विवाद बढ़ने पर, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के नेतृत्व में एक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को राज्य के संविधान के संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि दलितों और महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में बेहद सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए बीआरएस के नैतिक मूल्यों की तुलना नाजी पार्टी और कु क्लक्स क्लान (Ku Klux Klan) से की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस तेलंगाना को उस अंधेरे युग में वापस ले जाना चाहता है जहाँ छुआछूत एक सामान्य बात थी।

क्या आप जानते हैं?: तेलंगाना भारत के उन राज्यों में से एक है जहाँ सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष चला है, जिससे यहाँ की राजनीति में जातिगत मुद्दे अत्यंत संवेदनशील होते हैं।

प्रश्न 1: विवाद की मुख्य वजह क्या थी?
उत्तर: बीआरएस कार्यकर्ताओं द्वारा केसीआर के फार्महाउस की सड़क पर हल्दी और दूध छिड़ककर 'शुद्धिकरण' करना, क्योंकि वहाँ कांग्रेस के दलित कार्यकर्ता आए थे।

प्रश्न 2: कांग्रेस ने इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई की?
उत्तर: कांग्रेस ने विधानसभा में विरोध जताया और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।