संयुक्त अरब अमीरात (UAE) BRICS के साथ अपनी भागीदारी के माध्यम से आर्थिक सहयोग को वास्तविक विकास में बदलने का प्रयास कर रहा है। पूंजी और बाजारों को जोड़कर, UAE ग्लोबल साउथ में लचीलापन और स्थिरता लाना चाहता है।

  • UAE का ध्यान BRICS संवाद को वास्तविक व्यापार और निवेश अवसरों में बदलने पर है।
  • 2025 तक UAE के GDP में गैर-तेल क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगभग 79% हो गई है।
  • UAE-भारत साझेदारी BRICS आर्थिक कनेक्टिविटी के लिए एक स्वर्ण मानक के रूप में कार्य कर रही है।
  • सतत बुनियादी ढांचे के लिए पूंजी जुटाने हेतु न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) पर रणनीतिक ध्यान।

भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) खुद को विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में स्थापित कर रहा है। जनवरी 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बनने के बाद, UAE केवल राजनयिक सदस्यता से आगे बढ़कर एक ऐसे सहयोग मॉडल की वकालत कर रहा है जो सैद्धांतिक संरेखण के बजाय स्थिरता, लचीलापन और साझा समृद्धि को प्राथमिकता देता है।

UAE, BRICS की अंतर्निहित विविधता—जिसमें ऊर्जा निर्यातक, विनिर्माण केंद्र और पूंजी प्रदाता शामिल हैं—को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है। इन अलग-अलग आर्थिक संरचनाओं को जोड़कर, UAE एक ऐसा पूरक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहता है जहाँ ग्लोबल साउथ पारंपरिक पश्चिमी-केंद्रित वित्तीय निर्भरता से मुक्त होकर फल-फूल सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि UAE का दृष्टिकोण 'राजनीतिक गुट' की सोच से हटकर 'आर्थिक उपयोगिता' की सोच की ओर एक बदलाव है। 2.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अपनी सॉवरेन वेल्थ संपत्तियों का उपयोग करते हुए, UAE केवल BRICS में भाग नहीं ले रहा है, बल्कि ब्लॉक के महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहा है।

इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) है। अब तक 40 बिलियन डॉलर से अधिक के वित्तपोषण की मंजूरी के साथ, NDB सतत विकास के इंजन के रूप में कार्य करता है। NDB के साथ UAE का पुराना जुड़ाव अल्पकालिक सट्टा लाभ के बजाय उत्पादक, दीर्घकालिक विकास की दिशा में पूंजी जुटाने की उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

"सबसे मजबूत आर्थिक साझेदारी केवल सरकारी समझौतों के माध्यम से नहीं, बल्कि समाज के बीच स्थायी संबंधों के माध्यम से बनती है जो गहरे विश्वास का निर्माण करते हैं।"

UAE और भारत के बीच संबंध इस सफलता का एक खाका पेश करते हैं। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते ने 2025 में गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार को 76 बिलियन डॉलर से अधिक कर दिया है, जिसका लक्ष्य 2032 तक 200 बिलियन डॉलर करना है। यह साझेदारी साबित करती है कि जब दो पूरक अर्थव्यवस्थाएं अपने नियामक ढांचे को संरेखित करती हैं, तो विकास तेजी से होता है।

ऐतिहासिक रूप से, UAE ने तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था से एक वैश्विक रसद (logistics) और वित्तीय केंद्र में संक्रमण किया है। इसके विश्व स्तरीय बंदरगाह और हवाई अड्डे अब एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार के लिए भौतिक जुड़ाव का काम करते हैं, जिससे UAE BRICS नेटवर्क में एक अपरिहार्य नोड बन गया है।

मापदंड UAE-भारत व्यापार (2025) लक्ष्य व्यापार (2032)
गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार $76 बिलियन $200 बिलियन
वृद्धि दर (वार्षिक) 17% सतत वृद्धि
क्या आप जानते हैं?: UAE के GDP में अब गैर-तेल क्षेत्रों का योगदान लगभग 79% है, जो पेट्रोलियम निर्भरता से दूर जाने के एक सफल प्रयास का संकेत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: UAE वित्त के अलावा BRICS में कैसे योगदान देता है?
UAE अपने उन्नत बंदरगाहों और हवाई अड्डों के माध्यम से तीन महाद्वीपों के बाजारों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा प्रदान करता है।

प्रश्न 2: UAE की रणनीति में NDB की क्या भूमिका है?
न्यू डेवलपमेंट बैंक UAE को सदस्य देशों में सतत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पूंजी लगाने की अनुमति देता है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।