एक साल लंबे संगठनात्मक सुधार के बाद हरियाणा कांग्रेस में जमीनी स्तर पर उत्साह बढ़ा है। हालांकि, जातिगत समीकरण और योग्यता के बजाय सिफारिश पर आधारित नियुक्तियां अभी भी पार्टी के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।
- 'संगठन सृजन अभियान' ने एक दशक की निष्क्रियता के बाद बूथ स्तर की मशीनरी को पुनर्जीवित किया है।
- कार्यकर्ताओं के लिए प्रदर्शन-आधारित ग्रेडिंग सिस्टम और एक निश्चित रिपोर्टिंग चक्र लागू किया गया है।
- महिला प्रतिनिधित्व की कमी और जातिगत संतुलन अभी भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।
हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है, जहां हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (HPCC) लगातार तीन विधानसभा हारों के बाद खुद को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रही है। पिछले महीने गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के बुनियादी ढांचे को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने वाली युवा कांग्रेस और NSUI की सक्रियता इसी नए संगठनात्मक बदलाव का परिणाम है।
इस पुनरुद्धार के केंद्र में 'संगठन सृजन अभियान' है। यह एक साल तक चलने वाला एक गहन अभियान था, जिसका उद्देश्य उस ढांचे को फिर से बनाना था जो जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक पिछले दस वर्षों से पूरी तरह निष्क्रिय था। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और राज्य प्रभारी संजय दत्त के नेतृत्व में पार्टी ने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की है ताकि आंतरिक गुटबाजी को खत्म किया जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि कांग्रेस अब 'व्यक्ति-केंद्रित' मॉडल से हटकर 'प्रक्रिया-केंद्रित' मॉडल की ओर बढ़ रही है। एक ऐसी प्रदर्शन-आधारित ग्रेडिंग प्रणाली शुरू करना, जिसमें राज्य प्रभारी के काम की भी समीक्षा होती है, राज्य की राजनीति में एक कॉर्पोरेट-शैली की जवाबदेही लाने का प्रयास है। यह बदलाव बीजेपी की अनुशासित संगठनात्मक मशीनरी का मुकाबला करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पार्टी ने एक सख्त रिपोर्टिंग चक्र लागू किया है: महीने की 1 से 5 तारीख के बीच ब्लॉक बैठकें, 5 से 10 के बीच जिला बैठकें और 10 से 15 के बीच राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें होती हैं। इस व्यवस्थित दृष्टिकोण ने 90 में से 78 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को कवर किया है, जिससे कार्यकर्ताओं में नया जोश आया है।
कांग्रेस के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या वह जातिगत ध्रुवीकरण से ऊपर उठकर एक ऐसा समावेशी चेहरा पेश कर पाती है जो जाट और गैर-जाट दोनों मतदाताओं को आकर्षित करे।
उत्साह के बावजूद, बृजेंद्र सिंह और लाल बहादुर खोवाल जैसे अनुभवी नेताओं ने चेतावनी दी है कि केवल ढांचा खड़ा करना काफी नहीं है, उसे कार्यात्मक बनाना जरूरी है। चिंता यह है कि नियुक्तियां अभी भी योग्यता के बजाय वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशों पर आधारित हैं। इसके अलावा, जिला स्तर पर महिला प्रतिनिधित्व की भारी कमी पार्टी की सामाजिक इंजीनियरिंग में एक बड़ी चूक है।
पिछले चुनावों की यादें अभी भी पार्टी का पीछा कर रही हैं। बीजेपी ने सफलतापूर्वक जाट और गैर-जाट समीकरणों पर चुनाव लड़ा। वर्तमान नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि पार्टी को किसी एक विशेष जाति का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के रूप में न देखा जाए, जैसा कि चरखी दादरी जैसे जिलों में अभी भी दिख रहा है।
| विशेषता | पिछली स्थिति (पिछले 10 वर्ष) | वर्तमान स्थिति (अभियान के बाद) |
|---|---|---|
| बूथ प्रबंधन | निष्क्रिय/गैर-मौजूद | सक्रिय और व्यवस्थित |
| जवाबदेही | कोई नहीं/गुटबाजी | प्रदर्शन ग्रेडिंग सिस्टम |
| रिपोर्टिंग | अनियमित | निश्चित मासिक चक्र |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संगठन सृजन अभियान क्या है?
यह हरियाणा कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक संगठनात्मक सुधार अभियान है, जिसका उद्देश्य बूथ स्तर से ऊपर तक पार्टी के ढांचे को फिर से बनाना है।
आज हरियाणा कांग्रेस के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
मुख्य चुनौतियों में योग्यता आधारित नियुक्तियां सुनिश्चित करना, महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना और जातिगत ध्रुवीकरण को खत्म करना शामिल है।