पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने ब्रिक्स के भीतर आंतरिक मतभेदों को दूर करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। उन्होंने 'बहु-संरेखण' की तुलना में 'गुटनिरपेक्षता' को अधिक यथार्थवादी बताया है।
- भारत को ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आंतरिक विवादों को सुलझाने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
- सलमान खुर्शीद ने 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) को एक पलायन करार देते हुए 'गुटनिरपेक्षता' का समर्थन किया।
- अमेरिकी चुनावों के बाद वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना है।
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक कूटनीति पर चर्चा करते हुए पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत की रणनीतिक स्थिति का गहन विश्लेषण किया है। खुर्शीद के अनुसार, भारत वर्तमान में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे न केवल अपनी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी है, बल्कि सदस्य देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक 'ब्रिज बिल्डर' या सेतु निर्माता की भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स का वैश्विक प्रभाव तभी बढ़ेगा जब इसके भीतर के विरोधाभास समाप्त होंगे। विशेष रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव और अन्य सदस्य देशों की चिंताओं के बीच संतुलन बनाना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। खुर्शीद का मानना है कि वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने से पहले भारत को आंतरिक सामंजस्य स्थापित करने पर ध्यान देना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की कूटनीति अब केवल तटस्थ रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सक्रिय रूप से 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ बनने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, चीन के साथ सीमा विवाद और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन बनाना एक कठिन कार्य है। यह स्थिति भारत को एक वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर सकती है।
"बहु-संरेखण एक पलायन है, जबकि गुटनिरपेक्षता वास्तव में बहुत यथार्थवादी थी।" - सलमान खुर्शीद
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने शीत युद्ध के दौरान गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का नेतृत्व किया था। खुर्शीद का तर्क है कि आधुनिक युग में 'मल्टी-अलाइनमेंट' के नाम पर सभी के साथ संबंध रखना वास्तव में एक स्पष्ट नीति का अभाव हो सकता है। उनके अनुसार, गुटनिरपेक्षता ने भारत को एक स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने की शक्ति दी थी, जो आज के ध्रुवीकृत विश्व में फिर से प्रासंगिक हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका में आगामी चुनावों के बाद वैश्विक कूटनीतिक बदलावों की तैयारी पर भी चर्चा की गई। पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को संतुलित करते हुए विकासशील देशों के हितों की रक्षा करना भारत की प्राथमिकता बनी रहेगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सलमान खुर्शीद ने बहु-संरेखण को 'पलायन' क्यों कहा?
उत्तर: उनका मानना है कि यह एक स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता से बचने का तरीका है, जबकि गुटनिरपेक्षता एक ठोस और यथार्थवादी रणनीतिक विकल्प था।
प्रश्न 2: ब्रिक्स में भारत की वर्तमान चुनौती क्या है?
उत्तर: सदस्य देशों के बीच आंतरिक मतभेदों को सुलझाना और चीन के प्रभुत्व को संतुलित करना भारत की मुख्य चुनौती है।