मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय चुनाव प्रणाली को दुनिया की सबसे पारदर्शी प्रणालियों में से एक बताया। उन्होंने ईवीएम (EVM) की सुरक्षा पर भरोसा जताते हुए वादा किया कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट से नाम कटने की सभी शिकायतों का शत-प्रतिशत निवारण किया जाएगा।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि भारत की चुनावी प्रक्रिया वैश्विक स्तर पर पारदर्शिता की मिसाल है।
- एसआईआर (विशेष मतदाता सूची संशोधन) प्रक्रिया हालांकि जनता के लिए थोड़ी कठिन थी, लेकिन देश के मजबूत भविष्य के लिए यह आवश्यक थी।
- वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची से नाम हटने संबंधी शिकायतों का '110 फीसदी' समाधान किया जाएगा।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अहमदाबाद में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश की लोकतांत्रिक प्रणाली और चुनावी अखंडता को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया दुनिया की सबसे पारदर्शी प्रणालियों में से एक है। हाल के दिनों में मतदाता सूची और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर उठने वाले सवालों पर विराम लगाते हुए उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि देश का चुनावी ढांचा पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष है।
ज्ञानेश कुमार ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि हाल ही में लागू की गई एसआईआर (विशेष मतदाता सूची संशोधन/सत्यापन प्रक्रिया) आम जनता के लिए थोड़ी कठिन और जटिल जरूर थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मजबूत और पारदर्शी राष्ट्र के निर्माण के लिए इस तरह के कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी था। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है ताकि कोई भी फर्जी मतदाता लोकतंत्र के इस महापर्व को प्रभावित न कर सके।
ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठने वाले सवालों का करारा जवाब देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोहराया कि वोटिंग मशीनों को किसी भी तरह से हैक नहीं किया जा सकता है। उन्होंने तकनीकी सुरक्षा और प्रशासनिक प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए कहा कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की कोई भी गुंजाइश नहीं है। चुनाव आयोग समय-समय पर इस तकनीक की सुरक्षा की पुष्टि करता रहा है और वैश्विक मंच पर भी इसकी सराहना की गई है।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखना किसी भी देश की स्थिरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के बीच, चुनाव आयोग का ईवीएम की सुरक्षा और मतदाता सूची की शुद्धता पर इस तरह का मुखर रुख अपनाना बेहद आवश्यक है। यह न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारतीय लोकतंत्र की साख को मजबूत करता है।
मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम छूटने की शिकायतों पर बोलते हुए सीईसी ने एक बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले नाम-exclusion (नाम छूटने) से जुड़ी सभी शिकायतों का '110%' समाधान कर लिया जाएगा। आयोग का लक्ष्य है कि 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से शामिल हो ताकि कोई भी अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
त्रुटिहीन मतदाता सूची और सुरक्षित तकनीक ही एक जीवंत लोकतंत्र की असली पहचान हैं; हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना हमारा सर्वोच्च संवैधानिक कर्तव्य है।
नीचे दी गई तालिका में पारंपरिक बैलेट पेपर और आधुनिक ईवीएम (EVM) प्रणाली के बीच प्रमुख अंतरों को दर्शाया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि क्यों भारत ने इस आधुनिक तकनीक को अपनाया:
| विशेषता | ईवीएम (EVM) प्रणाली | बैलेट पेपर प्रणाली |
|---|---|---|
| सुरक्षा स्तर | अत्यधिक सुरक्षित, हैकिंग और हेरफेर असंभव | बूथ कैप्चरिंग और मतपेटी लूटने का खतरा |
| गणना की गति | कुछ ही घंटों में परिणाम घोषित | मैनुअल गिनती में दिनों का समय लगता है |
| कागज की बर्बादी | पर्यावरण अनुकूल, कागज का न्यूनतम उपयोग | लाखों टन कागज और पेड़ों की कटाई |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या ईवीएम को हैक किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, भारतीय ईवीएम पूरी तरह से स्टैंडअलोन मशीनें हैं जो किसी भी इंटरनेट या वायरलेस नेटवर्क से नहीं जुड़ी होती हैं, इसलिए इन्हें हैक करना तकनीकी रूप से असंभव है।
प्रश्न 2: 2029 के चुनावों के लिए चुनाव आयोग का क्या लक्ष्य है?
उत्तर: चुनाव आयोग का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और नाम छूटने से जुड़ी सभी शिकायतों का शत-प्रतिशत निवारण करना है।