कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत के जुड़ाव के लाभों पर संदेह जताया है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर भारत के बढ़ते वैश्विक कद को स्वीकार न करने का आरोप लगाया है।
- पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स के माध्यम से भारत को मिलने वाले वास्तविक लाभों पर प्रश्न उठाए।
- भाजपा ने इसे 'नाराज फूफा' वाला रवैया बताते हुए कांग्रेस की आलोचना की।
- शशि थरूर ने चिदंबरम के विपरीत ब्रिक्स के कुछ सकारात्मक पहलुओं को रेखांकित किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने हाल ही में ब्रिक्स (BRICS) समूह में भारत की भागीदारी और इससे होने वाले लाभों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चिदंबरम का तर्क है कि उन्हें इस गठबंधन से भारत के लिए कोई ठोस या स्पष्ट लाभ नजर नहीं आ रहे हैं, विशेष रूप से जब हम 2026 के भविष्य के लक्ष्यों की ओर देख रहे हैं।
इस बयान के तुरंत बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस टिप्पणी को भारत की विदेश नीति पर हमला करार दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ता नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी मजबूत स्थिति को स्वीकार करने में असमर्थ है।
विवाद तब और बढ़ गया जब राम माधव ने चिदंबरम के रवैये की तुलना 'नाराज फूफा' से की, यह संकेत देते हुए कि कांग्रेस केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है। भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि 1947 के बाद से कांग्रेस ने कूटनीतिक स्तर पर वास्तव में क्या हासिल किया है, जिससे वर्तमान सरकार की उपलब्धियों की तुलना की जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल दो पार्टियों के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह भारत की 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) विदेश नीति पर एक बड़ी बहस को जन्म देता है। जहाँ एक तरफ भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना चाहता है, वहीं आंतरिक राजनीतिक मतभेद वैश्विक मंच पर भारत की एकजुटता की छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
"जब घरेलू राजनीति विदेश नीति के विमर्श पर हावी हो जाती है, तो रणनीतिक स्पष्टता अक्सर राजनीतिक लाभ के नीचे दब जाती है।"
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के भीतर ही मतभेद दिखाई दिए। वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने चिदंबरम के विपरीत ब्रिक्स के कुछ लाभों की सूची साझा की, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर पूर्ण सहमति नहीं है।
ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच देने के लिए किया गया था। हालांकि, चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों ने हमेशा भारत की इस समूह में भूमिका को चुनौतीपूर्ण बनाया है, जो संभवतः चिदंबरम की चिंताओं का मूल कारण है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रिक्स की सदस्यता से भारत को मिलने वाले किसी स्पष्ट लाभ का पता नहीं चला है।
प्रश्न 2: भाजपा की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी?
भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद को स्वीकार नहीं कर पा रही है और यह केवल राजनीतिक द्वेष है।