भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव ने कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उपयोगिता पर उठाए गए सवालों का कड़ा जवाब दिया है। माधव ने चिदंबरम के रवैये की तुलना 'नाराज फूफा' से करते हुए भारत की वैश्विक स्थिति का बचाव किया।

  • राम माधव ने पी. चिदंबरम के ब्रिक्स संबंधी सवालों को 'नाराज फूफा' वाला रवैया बताया।
  • चिदंबरम ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले 'ठोस लाभ' पर सवाल उठाए थे।
  • भाजपा नेता ने तर्क दिया कि वैश्विक व्यवस्था बदल रही है और भारत इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे के ब्रिक्स राउंडटेबल 2026 के दौरान राजनीतिक माहौल तब गरमा गया जब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शब्दावली का उपयोग करते हुए, माधव ने चिदंबरम के दृष्टिकोण को 'नाराज फूफा' (disgruntled uncle) वाला रवैया करार दिया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब चिदंबरम ने ब्रिक्स बैठकों से भारत को होने वाले वास्तविक लाभों पर संदेह व्यक्त किया।

कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने हाल ही में यह सवाल उठाया था कि पिछले 2-3 ब्रिक्स सम्मेलनों से भारत को वास्तव में क्या मिला है। उन्होंने इन आयोजनों के 'ठोस लाभ' (tangible benefits) की कमी की ओर इशारा किया। चिदंबरम का तर्क था कि बड़े आयोजनों और शिखर सम्मेलनों के बावजूद, जमीनी स्तर पर परिणाम स्पष्ट नहीं हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति के विजन पर वैचारिक टकराव है। जहाँ सत्ता पक्ष ब्रिक्स को 'ग्लोबल साउथ' की आवाज और एक नई वैश्विक व्यवस्था (New World Order) के निर्माण के उपकरण के रूप में देखता है, वहीं विपक्ष इसे केवल प्रतीकात्मक कूटनीति मान रहा है। यह बहस भारत की अध्यक्षता वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई है, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

राम माधव ने पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह के मंचों की प्रासंगिकता को नकारना समकालीन वैश्विक वास्तविकता की समझ की कमी को दर्शाता है। उन्होंने चिदंबरम की याद दिलाई कि जब यूपीए सरकार के दौरान ब्रिक्स सम्मेलनों की मेजबानी की गई थी, तब क्या किसी ने उनके लाभ पर सवाल उठाए थे? माधव ने आश्चर्य व्यक्त किया कि एक पूर्व विदेश मंत्री इस तरह की बात कैसे कह सकते हैं।

"समकालीन वैश्विक राजनीति में बहुध्रुवीय दुनिया का उदय हो रहा है, और ब्रिक्स जैसे मंच भारत को वैश्विक शक्ति संतुलन में एक निर्णायक भूमिका प्रदान करते हैं।"

ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच प्रदान करने के लिए किया गया था। भारत ने हमेशा से इस समूह का उपयोग अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखने और पश्चिमी प्रभुत्व के विकल्प तलाशने के लिए किया है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स समूह ने हाल के वर्षों में अपना विस्तार किया है, जिससे यह अब केवल पांच देशों का समूह न रहकर एक व्यापक वैश्विक गठबंधन बन गया है।

Frequently Asked Questions

1. राम माधव ने चिदंबरम को 'नाराज फूफा' क्यों कहा?
क्योंकि चिदंबरम ने ब्रिक्स सम्मेलनों के लाभों पर सवाल उठाए थे, जिसे माधव ने विरोधियों की हताशा और नकारात्मक दृष्टिकोण के रूप में देखा।

p>2. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भारत के लिए क्या महत्व है?
यह भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) का नेतृत्व करने और प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक व रणनीतिक समन्वय स्थापित करने का अवसर देता है।