जम्मू-कश्मीर के एक फिल्म महोत्सव में वंदे मातरम के पूरे छह छंदों के गायन ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह टकराव इंडिया गठबंधन के भीतर वैचारिक मतभेदों को उजागर करता है।

  • कांग्रेस ने NC से धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिए वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाने की मांग की।
  • NC ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के पूरे छंद गाने के वीडियो साझा किए।
  • विवाद की जड़ जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन समारोह है।
  • PDP ने NC को BJP का 'मौन समर्थक' करार दिया।

जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। इंडिया (INDIA) गठबंधन के साथी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के तरीके को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह में, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और NC अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की उपस्थिति में गीत के सभी छह छंद गाए गए।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने X पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने NC से "हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के ज्ञान और निर्णय का सम्मान करने" का आग्रह किया। वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि गीत का पूरा संस्करण उस समावेशी और बहुलवादी लोकाचार के साथ मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और मौलाना आजाद जैसे नेताओं ने की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहले दो छंदों को गाने का निर्णय जानबूझकर लिया गया था ताकि गीत का सांप्रदायिकरण न हो।

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने भी इसे "चिंता का विषय" बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों की असली ताकत देश को जोड़ने में होती है, न कि विभाजन में। कर्रा ने कहा कि गठबंधन सहयोगियों को उस संवैधानिक यात्रा और परंपरा का सम्मान करना चाहिए जो आजादी के बाद से चली आ रही है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल शब्दों का विवाद नहीं है, बल्कि विपक्ष के भीतर 'धर्मनिरपेक्षता' की परिभाषा को लेकर एक लड़ाई है। कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को मजबूत करना चाहती है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का पलटवार यह दर्शाता है कि वह क्षेत्रीय राजनीति में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के दबाव में आने को तैयार नहीं है।

वंदे मातरम पर यह घर्षण इंडिया गठबंधन के भीतर के उस नाजुक संतुलन को दर्शाता है, जहां क्षेत्रीय पहचान अक्सर राष्ट्रीय पार्टी के निर्देशों से टकराती है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस आलोचना को चुपचाप स्वीकार नहीं किया। NC विधायक तनवीर सादिक ने पलटवार करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के वीडियो साझा किए, जिनमें वे आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाते नजर आ रहे हैं। इस कदम से कांग्रेस नेतृत्व पर पाखंड का आरोप लगा है।

इस अवसर का लाभ उठाते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने भी हमला बोला। PDP विधायक वाहिद पारा ने आरोप लगाया कि NC ने वक्फ संशोधन विधेयक और EVM जैसे मुद्दों पर झुककर वास्तव में BJP का रास्ता आसान किया है। उन्होंने NC को "अभ्यास में BJP का मौन समर्थक" बताया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक शक्तिशाली नारा बना। हालांकि, पहले दो छंदों के बाद के हिस्सों में हिंदू धार्मिक प्रतीकों का संदर्भ है, जो दशकों से राजनीतिक और धार्मिक बहस का विषय रहा है। 1950 में, संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान दिया, लेकिन आधिकारिक कार्यों के लिए पहले दो छंदों को ही मानक माना गया ताकि समावेशिता बनी रहे।

दृष्टिकोण कांग्रेस का पक्ष नेशनल कॉन्फ्रेंस का पक्ष
संस्करण केवल पहले दो छंद पूरे छह छंद
तर्क धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता सेनानियों की इच्छा कांग्रेस के अन्य मुख्यमंत्रियों का उदाहरण
मुख्य चिंता सांप्रदायिकरण को रोकना राजनीतिक स्वायत्तता और निरंतरता
क्या आप जानते हैं?: वंदे मातरम मूल रूप से 1882 में प्रकाशित 'आनंदमठ' नामक उपन्यास का हिस्सा था, इससे बहुत पहले कि यह राष्ट्रीय प्रतिरोध का प्रतीक बना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण पर विवाद क्यों है?
विवाद इसलिए है क्योंकि बाद के छंदों में धार्मिक चित्रण हैं, जिन्हें कुछ लोग भारतीय राज्य के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विपरीत मानते हैं।

2. इस विशिष्ट विवाद में कौन से मुख्य दल शामिल हैं?
मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) शामिल हैं।