तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राष्ट्रवादी सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के बारे में मांगी गई जानकारी पर 84 दिनों से चुप्पी साधी गई है। पूर्व सांसद साकेत गोखले ने अपंजीकृत राजनीतिक दलों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई है।
- साकेत गोखले ने NCPI के पंजीकरण, वित्त और पदाधिकारियों के विवरण के लिए RTI दाखिल की थी।
- TMC का आरोप है कि चुनाव आयोग ने 84 दिनों के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया है।
- 20 लोक सभा सांसद TMC छोड़कर NCPI में शामिल हुए, जिससे इस पार्टी की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठे हैं।
- RUPPs (पंजीकृत अपंजीकृत राजनीतिक दल) के माध्यम से टैक्स छूट का लाभ उठाकर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। गोखले ने खुलासा किया कि उन्होंने 16 जून को एक RTI आवेदन दाखिल किया था, जिसमें नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के पंजीकरण रिकॉर्ड, संविधान, पदाधिकारियों के विवरण और ऑडिट किए गए खातों की मांग की गई थी। हालांकि, आवेदन किए जाने के 84 दिन बीत जाने के बाद भी आयोग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह मामला तब और अधिक संवेदनशील हो गया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद, TMC के टिकट पर चुने गए 20 लोक सभा सांसदों ने अचानक अपनी निष्ठा बदलकर NCPI का दामन थाम लिया। NCPI एक 'पंजीकृत अपंजीकृत राजनीतिक दल' (RUPP) है, जिसके बारे में पहले बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी। गोखले ने सवाल उठाया कि आखिर कैसे 20 मौजूदा सांसद बिना किसी गहन जांच के एक ऐसी पार्टी में शामिल हो सकते हैं जिसका ट्रैक रिकॉर्ड संदिग्ध है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक राजनीतिक दल के आंतरिक विवाद का नहीं है, बल्कि यह भारतीय चुनावी राजनीति में 'शेल पार्टियों' के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। जब अपंजीकृत दल भारी मात्रा में चंदा प्राप्त करते हैं लेकिन चुनावों में उनकी भागीदारी नगण्य होती है, तो यह वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
"पंजीकृत अपंजीकृत राजनीतिक दल (RUPPs) अक्सर टैक्स छूट का लाभ उठाने और काले धन को सफेद करने के लिए एक कानूनी मुखौटे के रूप में उपयोग किए जाते हैं।"
गोखले ने गुजरात के छह ऐसे ही दलों का उदाहरण दिया जिन्होंने कथित तौर पर 1,700 करोड़ रुपये का योगदान प्राप्त किया, जबकि उनका चुनावी प्रदर्शन बेहद खराब रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को मिलने वाली टैक्स छूट का दुरुपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा है और चुनाव आयोग की चुप्पी इस संदेह को और गहरा करती है।
इसके अलावा, साकेत गोखले ने लोक सभा सचिवालय में एक दूसरी RTI दाखिल की है। इसमें उन 20 सांसदों द्वारा TMC छोड़ने और NCPI में शामिल होने के संबंध में किए गए पत्राचार और आधिकारिक निर्णयों के रिकॉर्ड मांगे गए हैं। TMC का आरोप है कि इन दलों के और भाजपा के बीच संबंधों के कारण ही चुनाव आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
Frequently Asked Questions
1. NCPI क्या है और यह विवाद क्यों है?
NCPI एक पंजीकृत अपंजीकृत राजनीतिक दल है। विवाद तब शुरू हुआ जब TMC के 20 सांसदों ने इसमें शामिल होने का दावा किया और अब इसकी वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
2. RTI के तहत क्या जानकारी मांगी गई थी?
पार्टी के पंजीकरण दस्तावेज, पदाधिकारियों की सूची, ऑडिट रिपोर्ट, चुनाव खर्च और चंदा प्राप्त करने की रिपोर्ट मांगी गई थी।