नवंबर के मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले, अमेरिकी अपील अदालत ने मेल-इन वोटिंग के विवादित नियमों को लागू करने के ट्रंप प्रशासन के प्रयास पर रोक लगा दी है।
- बोस्टन की फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने USPS के नए मेल-इन नियमों पर रोक बरकरार रखी।
- प्रस्तावित नियमों में ट्रैकिंग के लिए यूनिक बारकोड और मतदाता सूचियों की अनिवार्यता थी।
- अदालत ने चेतावनी दी कि नियमों को तुरंत लागू करने से 'अराजकता' और बड़े पैमाने पर मताधिकार का हनन हो सकता है।
बोस्टन, मैसाचुसेट्स की फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रयास को बड़ा झटका दिया है, जिसके जरिए वे मेल-इन वोटिंग (डाक द्वारा मतदान) की प्रक्रिया को बदलना चाहते थे। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में आठ सप्ताह से भी कम समय बचा है, और इस बीच अदालत ने उन नियमों पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है।
यह पूरा विवाद यूएस पोस्टल सर्विस (USPS) द्वारा अगस्त के अंत में जारी किए गए नियमों से जुड़ा है। इन नियमों के तहत राज्यों को अपने मेल-इन मतपत्रों को फिर से डिजाइन करना होगा ताकि उनमें यूनिक बारकोड शामिल किए जा सकें, जिससे संघीय सरकार उन्हें ट्रैक कर सके। साथ ही, USPS को यह अधिकार दिया गया था कि यदि मतपत्र नए मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो वह उन्हें भेजने से मना कर सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कार्यपालिका की शक्तियों पर एक महत्वपूर्ण अंकुश है। USPS के माध्यम से ट्रैकिंग को केंद्रीकृत करके, प्रशासन प्रभावी रूप से राज्य-शासित चुनावों के लिए एक संघीय फिल्टर बनाने की कोशिश कर रहा था। यदि इसे लागू किया जाता, तो तकनीकी खामियों के कारण लाखों वोट रद्द होने का खतरा था।
लीग ऑफ विमेन वोटर्स सहित मतदान अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूहों ने तर्क दिया कि ये नियम उन मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए हैं जो डाक मतदान पर निर्भर हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी न्याय विभाग ने दावा किया कि ये नियम चुनाव सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं और उनका उद्देश्य चुनाव प्रशासन पर नियंत्रण करना नहीं है।
"डाक रसद और संवैधानिक मतदान अधिकारों का मेल एक ऐसा संवेदनशील क्षेत्र है जहाँ एक छोटी सी तकनीकी गलती लाखों लोगों की आवाज़ को दबा सकती है।"
अदालत ने यूएस जिला न्यायाधीश इंदिरा तलवानी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि USPS के लिए करोड़ों लिफाफों को स्कैन करना एक "हरक्यूलिस जैसा कठिन कार्य" (अत्यंत कठिन) होगा, खासकर तब जब उनका डिजिटल पोर्टल अभी तक कार्यात्मक ही नहीं है।
ऐतिहासिक रूप से, अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव प्रशासन राज्यों का अधिकार है। हालांकि, ट्रंप ने कथित चुनावी धोखाधड़ी का हवाला देते हुए मतदान प्रतिबंधों को कड़ा करने की कोशिश की है। आलोचकों का कहना है कि यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की एक सोची-समझी कोशिश है, क्योंकि वर्तमान में रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत है, लेकिन डेमोक्रेट्स इसे पलटने की कोशिश कर रहे हैं।
| प्रस्तावित नियम | प्रशासन का तर्क | अदालत/आलोचकों का तर्क |
|---|---|---|
| यूनिक बारकोड | सुरक्षा और ट्रैकिंग | लॉजिस्टिक अराजकता का खतरा |
| मतदाता सूचियां | धोखाधड़ी रोकना | मताधिकार से वंचित करने का जोखिम |
| USPS वीटो पावर | मानकों का पालन | राज्य चुनावों में संघीय हस्तक्षेप |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यदि सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करता है तो क्या होगा?
यदि सुप्रीम कोर्ट रोक हटाता है, तो राज्यों को जल्दबाजी में बारकोड लागू करने होंगे, जिससे मतपत्रों की डिलीवरी में देरी हो सकती है।
प्रश्न 2: इन नियमों का विरोध कौन कर रहा है?
लीग ऑफ विमेन वोटर्स, 24 अमेरिकी राज्य और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया मुख्य रूप से इसका विरोध कर रहे हैं।