तेलंगाना पुलिस द्वारा महिला विधायकों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले के बाद बीआरएस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
- बीआरएस विधायकों ने 7 सितंबर को पुलिस द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के खिलाफ एनसीडब्ल्यू और एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई।
- महिला विधायकों की साड़ियाँ खींचने और उन्हें अपमानित करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- एफआईआर दर्ज न होने के कारण सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
तेलंगाना की राजनीति में तनाव तब और बढ़ गया जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से संपर्क किया। यह शिकायत 7 सितंबर को हैदराबाद में विधानसभा परिसर के सामने तेलंगाना पुलिस द्वारा महिला विधायकों के साथ किए गए कथित 'हमले और अभद्र व्यवहार' के संबंध में की गई है।
इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मंत्री पी. सबिता इंदिरा रेड्डी, वी. सुनीता लक्ष्मा रेड्डी, सत्यवती राठौड़, जी. जगदीश रेड्डी, विधायक कोवा लक्ष्मी, एस. वणी देवी और पी. राजेश्वर रेड्डी शामिल थे। साथ ही सांसद वी. रविचंद्र, डी. दामोदर राव और लीगल सेल के सदस्य भी उपस्थित थे। उन्होंने एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया के. रहाटकर और एनएचआरसी की सदस्य विजया भारती को बताया कि पुलिस ने उन्हें विधानसभा में प्रवेश करने से रोका और महिला नेताओं की साड़ियाँ खींचकर उनका अपमान किया।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक राजनीतिक टकराव नहीं है, बल्कि यह निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ पुलिस की कथित मनमानी की एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है। जब कानून की रक्षा करने वाली संस्थाओं पर ही महिला विधायकों की गरिमा को ठेस पहुँचाने का आरोप लगता है, तो यह वर्तमान प्रशासन के तहत पुलिस की तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इतनी गंभीर घटनाओं के 100 घंटे बाद भी एफआईआर दर्ज न होना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जवाबदेही से बचाने के व्यवस्थित प्रयास का संकेत है।
बीआरएस प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि घटना के 100 घंटे बीत जाने के बाद भी राज्य पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की है। इसी कारण, उन्होंने दोनों आयोगों से अनुरोध किया कि वे राज्य पुलिस को निर्देश दें कि विधानसभा परिसर के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बीआरएस विधायकों को आश्वासन दिया है कि वह इस पूरे मामले की जांच के लिए तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) से विस्तृत रिपोर्ट मांगेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बीआरएस और वर्तमान राज्य प्रशासन के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की सख्ती के आरोप पहले भी लगे हैं, लेकिन महिला विधायकों को निशाना बनाने का यह दावा क्षेत्रीय राजनीति में एक नए और अधिक उग्र अध्याय की शुरुआत है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: बीआरएस विधायकों ने एनसीडब्ल्यू और एनएचआरसी का रुख क्यों किया?
क्योंकि राज्य पुलिस ने विधानसभा परिसर के पास उनके साथ हुए दुर्व्यवहार और हमले के संबंध में एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था।
प्रश्न 2: एनसीडब्ल्यू इस मामले में क्या कार्रवाई कर रहा है?
एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि वह तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) से इस घटना पर रिपोर्ट मांगेंगी।