कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विशेष गहन संशोधन (SIR) के नियमों में ढील देते हुए वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और प्रवासी मतदाताओं के लिए परिवार के सदस्यों को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी है।
- वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, बीमार और प्रवासी मतदाताओं की ओर से वयस्क परिवार के सदस्य उपस्थित हो सकते हैं।
- यह निर्णय 'वीआईपी ट्रीटमेंट' के आरोपों और आम जनता की कठिनाइयों के बाद लिया गया है।
- अब तक 43 लाख से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से लगभग 25 लाख का वितरण अभी बाकी है।
समावेशिता और सुलभता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत, अब वयस्क परिवार के सदस्य विशिष्ट श्रेणियों के मतदाताओं की ओर से निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs) या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AEROs) के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं।
यह नीतिगत बदलाव विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए है जिन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में शामिल होने में वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिनमें वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन (PwD), गंभीर रूप से बीमार और प्रवासी मतदाता शामिल हैं। इससे पहले नियम बेहद सख्त थे: केवल वही व्यक्ति सुनवाई में उपस्थित हो सकता था जिसके खिलाफ नोटिस जारी किया गया था। इस कठोर व्यवस्था के कारण उन मतदाताओं में काफी नाराजगी थी जो यात्रा करने में असमर्थ थे या शारीरिक रूप से अक्षम थे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्देश केवल एक प्रक्रियात्मक अपडेट नहीं है, बल्कि असमानता के बढ़ते विमर्श का जवाब है। ऐसी खबरें आई थीं कि जहां कमजोर और वंचित मतदाता नौकरशाही की जटिलताओं से जूझ रहे थे, वहीं कुछ 'वीआईपी' हस्तियों को उनके घरों पर ही सुनवाई की सुविधा दी जा रही थी। कमजोर वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व को औपचारिक बनाकर, CEO लोकतांत्रिक समानता लाने का प्रयास कर रहे हैं।
"लोकतांत्रिक भागीदारी शारीरिक कमजोरी या भौगोलिक दूरी से बाधित नहीं होनी चाहिए; पारिवारिक प्रतिनिधित्व की अनुमति देना एक समावेशी मतदाता सूची की दिशा में आवश्यक कदम है।"
संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. योगेश्वर द्वारा जारी यह निर्देश सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, कर्नाटक के उपायुक्तों और बीबीएमपी (BBMP) चुनाव जिलों पर लागू होता है। EROs और AEROs को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे राजनीतिक दलों के साथ अपनी साप्ताहिक बैठकों के दौरान इन प्रक्रियाओं को पारदर्शी रूप से समझाएं ताकि आगे कोई भ्रम न रहे।
इस पूरे अभियान का पैमाना बहुत बड़ा है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के 10 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 43,81,760 नोटिस जेनरेट किए गए हैं। हालांकि, वितरण में अभी भी चुनौतियां हैं, क्योंकि केवल 56.99% नोटिस ही वितरित हो पाए हैं। वर्तमान में 17 लाख से अधिक सुनवाई लंबित हैं, जो प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विशेष गहन संशोधन (SIR) एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसका उपयोग डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाने, मृत मतदाताओं के नाम काटने और निवासियों की पात्रता को सत्यापित करने के लिए किया जाता है ताकि मतदाता सूची की शुद्धता बनी रहे। हाल के वर्षों में, कर्नाटक में मतदाता सूची प्रबंधन को लेकर काफी विवाद रहे हैं, और राजनीतिक दलों ने अक्सर विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में विसंगतियों का आरोप लगाया है।
| श्रेणी | पिछला नियम | नया नियम |
|---|---|---|
| सामान्य मतदाता | व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य | व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य |
| वरिष्ठ नागरिक/दिव्यांग/बीमार | व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य | वयस्क परिवार के सदस्य मान्य |
| प्रवासी मतदाता | व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य | वयस्क परिवार के सदस्य मान्य |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या कोई मित्र या वकील SIR सुनवाई में मतदाता का प्रतिनिधित्व कर सकता है?
नहीं, वर्तमान निर्देश विशेष रूप से केवल वयस्क परिवार के सदस्यों को ही पात्र श्रेणियों का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति देते हैं।
प्रश्न 2: क्या सामान्य मतदाताओं को अभी भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा?
हाँ, छूट केवल वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, बीमार व्यक्तियों और प्रवासी मतदाताओं के लिए है; अन्य सभी मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है।