कर्नाटक के कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की बहू, डॉ. अंकिता यरलगल पर सरकारी नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वेतन प्राप्त करने के गंभीर आरोप लगे हैं। वह पूर्णकालिक एमडी छात्र होने के बावजूद सरकारी क्लिनिक में ड्यूटी नहीं कर रही हैं।

  • कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की बहू डॉ. अंकिता यरलगल पर अनियमितताओं का आरोप।
  • एमडी (पैथोलॉजी) की पढ़ाई के दौरान भी ₹75,000 मासिक वेतन लेने का दावा।
  • जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार यरलगल पर मामले को दबाने का आरोप।

बगालकोट, कर्नाटक से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद सामने आया है। कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की बहू, डॉ. अंकिता यरलगल पर स्वास्थ्य विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वित्तीय अनियमितता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। डॉ. अंकिता, जो कि बगालकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) डॉ. राजकुमार यरलगल की पुत्री भी हैं, वर्तमान में एक गंभीर स्थिति में घिरी हुई हैं।

आरोप है कि डॉ. अंकिता ने सितंबर 2025 में बगालकोट की वाम्बे कॉलोनी स्थित 'नम्मा क्लिनिक' में एक चिकित्सक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की थी। हालांकि, मार्च 2026 में उन्होंने एस.एन. मेडिकल कॉलेज में एमडी (पैथोलॉजी) के लिए पूर्णकालिक प्रवेश ले लिया। सरकारी नियमों के अनुसार, एक पूर्णकालिक छात्र सरकारी सेवा के साथ नियमित वेतन प्राप्त नहीं कर सकता, लेकिन आरोप है कि वह फिर भी हर महीने ₹75,000 का वेतन ले रही हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में व्याप्त 'भाई-भतीजावाद' और प्रशासनिक मिलीभगत को उजागर करता है। जब एक उच्च पदस्थ अधिकारी की संतान ही नियमों को ताक पर रखकर लाभ उठाती है, तो यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

सरकारी पद का दुरुपयोग और नियमों का उल्लंघन सार्वजनिक धन की चोरी के समान है, जो व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को तोड़ता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. अंकिता को सुबह 9 बजे से शाम 4:30 बजे तक क्लिनिक में उपस्थित रहना चाहिए, लेकिन कॉलेज की कक्षाओं में व्यस्त होने के कारण क्लिनिक अक्सर बंद रहता है। इससे स्थानीय जनता को आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है।

Historical Background

कर्नाटक में राजनीतिक परिवारों के सदस्यों द्वारा सरकारी पदों और सुविधाओं का लाभ उठाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। यह मामला मौजूदा प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक नया प्रश्नचिह्न लगाता है, विशेषकर तब जब आरोपी का पिता स्वयं स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख है।

Did You Know?: सरकारी नियमों के तहत, यदि कोई कर्मचारी उच्च शिक्षा के लिए पूर्णकालिक अध्ययन करता है, तो उसे या तो अवकाश (Leave) लेना पड़ता है या इस्तीफा देना पड़ता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डॉ. अंकिता यरलगल पर मुख्य आरोप क्या है?
उत्तर: उन पर एमडी की पूर्णकालिक पढ़ाई के बावजूद सरकारी क्लिनिक से ₹75,000 मासिक वेतन लेने का आरोप है।

प्रश्न 2: इस मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी की क्या भूमिका है?
उत्तर: आरोप है कि डीएचओ डॉ. राजकुमार यरलगल अपनी बेटी के इस मामले को दबाने और नियमों की अनदेखी करने में मदद कर रहे हैं।