DMK नेता आई. पेरियासामी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा एम.के. स्टालिन के खिलाफ दिए गए बयानों को 'अहंकारी' और 'सत्ता के नशे में चूर' बताया है। डिंडिगुल में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की।
- DMK नेता आई. पेरियासामी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बयानों को अपमानजनक बताया।
- विधानसभा की कार्यवाही को 'शर्मनाक' करार दिया गया।
- डिंडिगुल और विरुधुनगर में DMK कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।
- भ्रष्टाचार के आरोपों पर पेरियासामी ने मुख्यमंत्री की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाए।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। DMK के वरिष्ठ नेता आई. पेरियासामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के खिलाफ विधानसभा में दिए गए बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की है। पेरियासामी ने इन टिप्पणियों को 'अहंकारी' और 'सत्ता के नशे में चूर' करार दिया है।
डिंडिगुल में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए, पेरियासामी ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले राजनीति सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को एम.के. स्टालिन के खिलाफ बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। तीन दशकों से अधिक समय तक विधायक रहने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा में कभी इतनी 'शर्मनाक' कार्यवाही नहीं देखी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की सत्ता संरचना और विधानसभा की गरिमा के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री और विपक्ष के बीच का यह तीखा संघर्ष आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
विवाद की जड़ में विधानसभा की वह कार्यवाही है जहाँ विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन ने TVK शासन की विफलता पर 15 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे थे। पेरियासामी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उत्तर देने के बजाय अहंकार दिखाते हुए DMK विधायकों को तीन दिन प्रतीक्षा करने को कहा और यह भी निर्देश दिया कि वे उस दिन अनुपस्थित न रहें।
"मुख्यमंत्री ने एक तैयार भाषण पढ़ा और विपक्ष के जायज सवालों को टालने की कोशिश की, जो संसदीय लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।"
पेरियासामी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के साथ भी उनके तीखे विवाद हुए थे, लेकिन वे कभी भी मर्यादा नहीं भूलते थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि DMK के खिलाफ भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप को कभी साबित नहीं किया जा सका है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देने पर उनकी राजनीतिक परिपक्वता पर भी सवाल उठाए।
विरोध प्रदर्शन का विस्तार केवल डिंडिगुल तक सीमित नहीं था। विरुधुनगर में भी लगभग 450 DMK कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जिसका नेतृत्व जिला सचिवों द्वारा किया गया। इस दौरान पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों सहित कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पेरियासामी ने मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाए?
उत्तर: उन्होंने मुख्यमंत्री पर अहंकारी व्यवहार करने और एम.के. स्टालिन के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया।
प्रश्न 2: विरोध प्रदर्शन कहाँ-कहाँ हुआ?
उत्तर: मुख्य रूप से डिंडिगुल और विरुधुनगर में DMK कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।