असम के पूर्व उपायुक्त (DC) और आईएएस अधिकारी देवाशीष शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। भाजपा ने उन्हें नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

  • 2011 बैच के आईएएस अधिकारी देवाशीष शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली।
  • सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद भाजपा में शामिल होकर चुनावी मैदान में उतरे।
  • कांग्रेस ने चुनाव आयोग से उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की समीक्षा की मांग की है।

असम की राजनीति में एक चौंकाने वाला मोड़ आया है जब देवाशीष शर्मा, जिन्होंने हाल ही में नागांव जिले के उपायुक्त (DC) पद से इस्तीफा दिया था, को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार चुना है। शर्मा 2011 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और अपनी निष्पक्ष प्रशासनिक छवि के लिए जाने जाते हैं।

भाजपा के असम प्रवक्ता रूपम गोस्वामी ने इस नामांकन का समर्थन करते हुए कहा कि शर्मा एक कुशल नौकरशाह रहे हैं और उनमें समाज सेवा की गहरी भावना है। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता और विभिन्न समुदायों के बीच उनकी स्वीकार्यता उन्हें इस संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र में एक मजबूत दावेदार बनाती है।

शर्मा का करियर काफी प्रभावशाली रहा है। नागांव के डीसी बनने से पहले, उन्होंने पड़ोसी जिले मोरीगांव में भी अपनी सेवाएं दीं, जो नागांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का ही हिस्सा है। इसके अलावा, मुंबई में असम भवन के डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान टाटा मेमोरियल अस्पताल में इलाज कराने वाले कैंसर रोगियों की मदद करने के प्रयासों ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, एक उच्च पदस्थ नौकरशाह का इतनी तेजी से राजनीति में प्रवेश करना न केवल प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भाजपा की उस रणनीति को भी दर्शाता है जिसमें वे 'क्लीन इमेज' वाले प्रशासकों को चुनावी मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। नागांव जैसे मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्र में, जहां कांग्रेस का लंबे समय से वर्चस्व रहा है, एक लोकप्रिय प्रशासक को उतारना भाजपा की एक सोची-समझी चाल है।

"प्रशासनिक अनुभव को राजनीतिक पूंजी में बदलना एक जोखिम भरा लेकिन प्रभावी दांव हो सकता है, बशर्ते उम्मीदवार की छवि निष्पक्ष बनी रहे।"

हालांकि, इस कदम ने विपक्षी कांग्रेस को सतर्क कर दिया है। धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मांग की है कि शर्मा के कार्यकाल के दौरान लिए गए सभी चुनाव संबंधी निर्णयों की गहन समीक्षा की जाए। उनका तर्क है कि जिला चुनाव अधिकारी (DEO) के रूप में शर्मा के पास ईवीएम प्रबंधन और मतदान व्यवस्था जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां थीं, जो आगामी चुनाव को प्रभावित कर सकती हैं।

नागांव निर्वाचन क्षेत्र का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। पिछले एक दशक से यह सीट कांग्रेस के पास थी, लेकिन हाल ही में पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने और दूसरी सीट से जीतने के बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। वर्तमान में असम की 14 लोकसभा सीटों में से 11 पर भाजपा का कब्जा है।

क्या आप जानते हैं?: नागांव लोकसभा क्षेत्र अपनी विविधता और संवेदनशील जनसांख्यिकी के कारण असम की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में से एक माना जाता है।

Frequently Asked Questions

1. देवाशीष शर्मा कौन हैं?
देवाशीष शर्मा 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और नागांव तथा मोरीगांव जिलों के पूर्व उपायुक्त रह चुके हैं।

2. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से क्या मांग की है?
कांग्रेस ने मांग की है कि शर्मा के डीसी-सह-जिला चुनाव अधिकारी के रूप में लिए गए सभी निर्णयों की जांच की जाए ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।