उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत ने अपने निजी सहायक (PA) के आवास पर ईडी की छापेमारी और भारी मात्रा में नकदी व सोने की बरामदगी के बाद कांग्रेस के विभिन्न पदों से इस्तीफा दे दिया है।

  • हरिश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी और CWC के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दिया।
  • ED ने पीए चंदन सिंह जीना के पास से 32 लाख रुपये, सोने के सिक्के, चेन और लग्जरी घड़ियाँ जब्त कीं।
  • यह मामला 2016 के VPDO परीक्षा घोटाले से जुड़ा हुआ है।

उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरिश रावत ने शनिवार को पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से अपने इस्तीफे की घोषणा की। यह कदम प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उनके निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद उठाया गया है। रावत ने स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष में कोई कमजोरी आए।

शुक्रवार को की गई इस कार्रवाई में ईडी ने चौंकाने वाले खुलासे किए। जांच एजेंसी ने चंदन सिंह जीना के परिसर से 32 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, 13 सोने के सिक्के और सात सोने की चेन (कुल वजन लगभग 200.5 ग्राम) बरामद किए। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की 12 महंगी लग्जरी कलाई घड़ियाँ भी जब्त की गई हैं। यह पूरी कार्रवाई 2016 के ग्राम सेवक (VPDO) भर्ती परीक्षा मामले से जुड़ी हुई है, जिसमें ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this resignation is a strategic move to prevent the ruling party from using the scandal to damage the Congress party's image ahead of the upcoming Uttarakhand elections. By stepping down, Rawat is attempting to decouple his political identity from the alleged corruption of his aide, though the timing suggests immense pressure from the central agencies.

हरिश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा के कारण वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पदों को छोड़ रहे हैं। उन्होंने चंदन सिंह जीना को एक 'विनम्र और मेहनती व्यक्ति' बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यदि ओएमआर शीट में छेड़छाड़ के सबूत मिलते हैं, तो वह इस कृत्य से शर्मिंदा हैं।

केंद्र सरकार की एजेंसियां अक्सर चुनाव से ठीक पहले विपक्षी नेताओं के करीबियों को निशाना बनाती हैं ताकि एक विशिष्ट नैरेटिव सेट किया जा सके।

रावत ने इस पूरी कार्रवाई को एक राजनीतिक साजिश के रूप में देखा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह हमेशा मजाक में कहते थे कि चुनाव तब होंगे जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार सीबीआई या ईडी ने उनके दरवाजे के बजाय उनके सहयोगी के दरवाजे पर दस्तक देकर एक खास नैरेटिव बनाने की कोशिश की है।

क्या आप जानते हैं?: VPDO भर्ती मामला उत्तराखंड में सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में से एक रहा है, जिसने राज्य की शिक्षा और रोजगार प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

Frequently Asked Questions

1. हरिश रावत ने किन पदों से इस्तीफा दिया है?
उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दिया है।

2. ईडी ने छापेमारी में क्या-क्या जब्त किया?
ईडी ने 32 लाख रुपये नकद, लगभग 200.5 ग्राम सोना (सिक्के और चेन) और 12 महंगी लग्जरी घड़ियाँ जब्त की हैं।