पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि राज्य में वामपंथियों और टीएमसी के शासनकाल के दौरान हिंदू परंपराओं को जानबूझकर कमजोर किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा अब इन प्राचीन सांस्कृतिक विरासतों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- सुवेंदु अधिकारी ने वाम मोर्चा और टीएमसी पर बंगाली हिंदू परंपराओं को नष्ट करने का आरोप लगाया।
- उन्होंने दावा किया कि 34 साल के वामपंथी शासन में धार्मिक ग्रंथों के बजाय मार्क्स और लेनिन के साहित्य को बढ़ावा दिया गया।
- बांग्लादेशी हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास प्रभु के मुद्दे पर उन्होंने वैश्विक स्तर पर 'सनातनियों' की एकजुटता की बात की।
- भाजपा सरकार द्वारा दुर्गा पूजा और अन्य त्योहारों के पारंपरिक कैलेंडर को बहाल करने का वादा।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को एक कड़ा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में दशकों तक शासन करने वाले वाम मोर्चे (Left Front) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बंगाली हिंदुओं की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को व्यवस्थित रूप से नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया है। केस्टोपुर में एक गणेश पूजा के उद्घाटन के दौरान बोलते हुए, अधिकारी ने कहा कि भाजपा अब उन विरासतों को वापस लाने का काम कर रही है जिन्हें दशकों तक दबाया गया।
अधिकारी ने विशेष रूप से 34 साल के वामपंथी शासन और पिछले 15 वर्षों के टीएमसी शासन का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि के दौरान हिंदू रीति-रिवाजों, धार्मिक ग्रंथों और त्योहारों को जानबूझकर हाशिए पर धकेल दिया गया। उन्होंने एक गंभीर दावा करते हुए कहा कि उस दौर में पूजा पंडालों में स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन के कार्यों के बजाय कार्ल मार्क्स और लेनिन की पुस्तकें अधिक दिखाई देती थीं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this narrative is a strategic move to consolidate the 'Sanatan' vote bank in West Bengal by linking cultural identity with political liberation. By positioning the BJP as the 'restorer' of tradition, Adhikari is attempting to paint the previous regimes as anti-culture and ideologically alien to the Bengali Hindu ethos.
भाषण के दौरान, उन्होंने बांग्लादेशी हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास प्रभु के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि चिन्मय प्रभु के आंसू ने दुनिया भर के सनातनियों को झकझोर दिया है। यह बयान टीएमसी की उस आलोचना के जवाब में आया जिसमें भाजपा पर भिक्षु की दुर्दशा पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया गया था।
"Cultural identity in Bengal is deeply intertwined with religious practice; targeting this is a potent political tool for mobilization."
अधिकारी ने टीएमसी सरकार पर धर्म, भाषा और त्योहारों के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक पुराने उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि मुहर्रम के कारण दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब दुर्गा पूजा के दौरान केवल पंचांग (almanac) में लिखी बातों का ही पालन होगा और पारंपरिक कैलेंडर को पूरी तरह बहाल किया जाएगा।
Frequently Asked Questions
1. सुवेंदु अधिकारी ने किन सरकारों पर आरोप लगाए हैं?
उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व वामपंथी सरकार और वर्तमान/पिछली टीएमसी सरकार पर हिंदू परंपराओं को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है।
2. चिन्मय कृष्ण दास प्रभु कौन हैं?
वे एक बांग्लादेशी हिंदू भिक्षु हैं, जिनके प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने वैश्विक सनातनियों की भावनाओं का जिक्र किया।