छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण सतनामी समुदाय के नेता गुरु दलदास साहेब ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। उन्होंने भाजपा पर गुरु बाबा घासीदास के सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
- गुरु दलदास साहेब, भाजपा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई हैं।
- दल बदलने का मुख्य कारण भाजपा द्वारा गुरु बाबा घासीदास के सिद्धांतों की अनदेखी बताया गया।
- दलदास साहेब ने 2028 के विधानसभा चुनावों में मूँगेली सीट से लड़ने की इच्छा जताई।
- कांग्रेस ने इसे भाजपा के लिए एक बड़ा झटका बताया है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य के प्रभावशाली सतनामी समुदाय के प्रमुख नेता और वर्तमान भाजपा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई, गुरु दलदास साहेब ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। यह घटनाक्रम राज्य के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकता है।
गुरु दलदास साहेब का कांग्रेस में प्रवेश पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में हुआ। बघेल ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उत्साह व्यक्त करते हुए लिखा कि यह भाजपा को सत्ता से हटाने की दिशा में एक बड़ी शुरुआत है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटनाक्रम को 'ट्रेलर' बताते हुए संकेत दिया कि भाजपा के कई अन्य नेता भी जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ की लगभग 13% जनसंख्या सतनामी समुदाय से संबंधित है, जो राज्य में सबसे बड़ा अनुसूचित जाति (SC) समूह है। चूंकि गुरु दलदास साहेब का परिवार 19वीं सदी के समाज सुधारक गुरु बाबा घासीदास के वंश से संबंध रखता है, इसलिए उनका कांग्रेस में जाना सीधे तौर पर इस बड़े वोट बैंक को प्रभावित करने वाला कदम है।
गुरु दलदास साहेब का कांग्रेस में जाना सतनामी समुदाय के राजनीतिक झुकाव में एक बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।
अपने इस फैसले पर सफाई देते हुए गुरु दलदास साहेब ने कहा कि भाजपा अब गुरु बाबा घासीदास के सिद्धांतों के अनुसार कार्य नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस राजनीतिक निर्णय से उनके परिवार में कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने भविष्य की रणनीति साझा करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस उन्हें अवसर देती है, तो वह 2028 के विधानसभा चुनाव में मूँगेली (अनुसूचित जाति आरक्षित सीट) से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
छत्तीसगढ़ में सतनामी पंथ का गहरा प्रभाव है। गुरु बाबा घासीदास ने समानता और सामाजिक न्याय का संदेश दिया था। राजनीतिक रूप से, दलदास साहेब का परिवार पहले कांग्रेस में था, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले उनके पिता गुरु बलदास साहेब और उनके भाई खुशवंत साहेब ने भाजपा का रुख किया था। अब दलदास साहेब की वापसी ने कांग्रेस को एक मजबूत आधार प्रदान किया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. गुरु दलदास साहेब कौन हैं?
वह छत्तीसगढ़ के भाजपा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई हैं और सतनामी समुदाय के एक प्रभावशाली नेता हैं।
2. उन्होंने भाजपा क्यों छोड़ी?
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा गुरु बाबा घासीदास के सिद्धांतों का पालन नहीं कर रही है।