गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला के खिलाफ विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। विधायक पर सदन में वंदे मातरम के गायन के दौरान बीच में ही बैठ जाने और राष्ट्रीय गीत का अनादर करने का आरोप है।

  • गुजरात विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की।
  • विधायक पर वंदे मातरम के गायन के दौरान बीच में बैठने और सदन की गरिमा भंग करने का आरोप है।
  • मामले की जांच विशेषाधिकार समिति करेगी, जिसमें निष्कासन तक की संभावना जताई जा रही है।

गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने शुक्रवार को एक कड़ा निर्णय लेते हुए कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला के खिलाफ विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। यह विवाद मानसून सत्र के पहले दिन शुरू हुआ, जब सदन में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का गायन हो रहा था और खेड़ावाला दूसरे छंद के पूरा होने के बाद अपनी सीट पर बैठ गए।

यह मामला तब गरमाया जब उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस घटना पर 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' उठाया। उन्होंने इसे एक अत्यंत गंभीर मामला बताया, क्योंकि सदन लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और यहां राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान अनिवार्य है। इमरान खेड़ावाला, जो अहमदाबाद की जमलपुर-खाडिया सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, 182 सदस्यीय विधानसभा में एकमात्र मुस्लिम विधायक हैं।

क्यों है यह मामला गंभीर?

विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सदन के वीडियो फुटेज की जांच की है। उनके अनुसार, खेड़ावाला ने शुरुआत में खड़े होकर सम्मान जताया, लेकिन गीत के बीच में ही बैठ गए। BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक व्यक्तिगत व्यवहार का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा संवैधानिक शपथ के उल्लंघन का मामला है। प्रत्येक विधायक भारत के संविधान, उसकी संप्रभुता और अखंडता के प्रति निष्ठा की शपथ लेता है।

सदन की गरिमा और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होता है; इसका उल्लंघन संसदीय लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है।

अध्यक्ष चौधरी ने यह भी उल्लेख किया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार, फरवरी 2026 से सदन में वंदे मातरम के छह छंद गाए जा रहे हैं। उन्होंने खेड़ावाला की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने सदन में स्पष्टीकरण देने के बजाय मीडिया को बयान दिए, जो संसदीय मर्यादा के विपरीत है।

विशेषाधिकार समिति की संरचना

इस मामले की जांच करने वाली समिति का नेतृत्व भुज के भाजपा विधायक केशुभाई पटेल कर रहे हैं। समिति में कुल सात सदस्य हैं, जिनमें से पांच भाजपा से हैं और एकमात्र कांग्रेस सदस्य वडगाम विधायक जिग्नेश मेवाणी हैं।

पक्ष तर्क/स्थिति
विधानसभा अध्यक्ष जानबूझकर नियमों का उल्लंघन और सदन की अवमानना।
इमरान खेड़ावाला इसे अपना व्यक्तिगत निर्णय बताया।
कांग्रेस पार्टी दूरी बना ली; इसे पार्टी का स्टैंड नहीं बताया।

विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि यदि खेड़ावाला समिति के समक्ष अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगते हैं, तो मामले की गंभीरता कम हो सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि उन्हें सदन से निष्कासित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या आप जानते हैं?: वंदे मातरम के मूल गीत में छह छंद हैं, और भारत सरकार के निर्देशों के बाद कई विधायी निकायों ने पूर्ण संस्करण को अपनाना शुरू किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. विशेषाधिकार कार्यवाही क्या होती है?
जब कोई सदस्य या बाहरी व्यक्ति सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है या अध्यक्ष के आदेशों का उल्लंघन करता है, तो सदन अपनी शक्तियों के तहत जांच और दंड के लिए विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू करता है।

2. इस मामले में अधिकतम सजा क्या हो सकती है?
समिति की रिपोर्ट के आधार पर, सदस्य को चेतावनी दी जा सकती है, माफीनामा मांगा जा सकता है या गंभीर स्थिति में सदन से निष्कासित किया जा सकता है।