बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य में बाढ़ की भयावह स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार को 'सौतेला बच्चा' माना जा रहा है और 'डबल इंजन' सरकार पूरी तरह विफल है।

  • बिहार में बाढ़ से 48 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
  • तेजस्वी यादव ने बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की है।
  • RJD नेता ने 'डबल इंजन' सरकार पर उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया है।
  • राज्य के खजाने के खाली होने और केंद्रीय सहायता की कमी पर सवाल उठाए गए हैं।

पटना: बिहार के नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को राज्य में आई भीषण बाढ़ के मुद्दे पर केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकार पर जोरदार हमला बोला। यादव ने आरोप लगाया कि बिहार के साथ 'सौतेले व्यवहार' किया जा रहा है और आपदा के इस कठिन समय में सरकारें पूरी तरह उदासीन हैं।

तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि बिहार में बाढ़ से अब तक 48 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि बिहार की इस त्रासदी को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित किया जाए और प्रभावित परिवारों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और मुआवजे की घोषणा की जाए।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि बिहार में बाढ़ की समस्या केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी है। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी और वित्तीय संसाधनों का अभाव सीधे तौर पर आम जनता के जीवन को प्रभावित कर रहा है।

यादव ने तीखा हमला करते हुए कहा कि बिहार में 8 एनडीए मंत्री और 30 लोकसभा सांसद होने के बावजूद राज्य के लोगों को इस संकट से अकेले जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार के दोनों इंजन ही जल चुके हैं, जिससे सहायता लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है।"

"बिहार को सौतेला बच्चा समझा जा रहा है, जहाँ आपदा के समय केवल चुनावी वादे याद आते हैं, राहत नहीं।"

तेजस्वी यादव ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 2008 की कोसी बाढ़ के दौरान उनके पिता लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने बिहार का दौरा किया था और राहत सुनिश्चित की थी। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार का रवैया उपेक्षापूर्ण है। उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बारिश होते ही राहत शिविर और सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाती है, जबकि बिहार में लोग तबाही झेल रहे हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने जुलाई में आकस्मिक निधि से 4,000 करोड़ रुपये निकाले थे, लेकिन उसका उपयोग वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए किया गया, जिससे राज्य का खजाना खाली हो गया है।

Historical Background

बिहार ऐतिहासिक रूप से बाढ़ की समस्या से जूझता रहा है। कोसी नदी, जिसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है, हर साल लाखों लोगों को विस्थापित करती है। 2008 की कोसी त्रासदी ने राज्य की बुनियादी संरचना को भारी नुकसान पहुँचाया था, जिसके बाद से आपदा प्रबंधन की मांग निरंतर उठती रही है।

Frequently Asked Questions

1. तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से क्या मांग की है?
उन्होंने बिहार की बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने और प्रभावितों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है।

2. बिहार में वर्तमान में कितने लोग बाढ़ से प्रभावित हैं?
बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, लगभग 48.35 लाख लोग 15 जिलों के 87 ब्लॉकों में प्रभावित हैं।

Did You Know?: कोसी नदी अपने मार्ग बदलने के लिए जानी जाती है, जो बिहार में बार-बार आने वाली विनाशकारी बाढ़ का मुख्य कारण है।