तुर्की के अधिकारियों ने एलजीबीटीक्यू+ और एचआईवी सहायता समूहों को लक्षित करते हुए व्यापक दमन अभियान शुरू किया है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की निंदा को बुलंद किया है।
- तुर्की पुलिस ने कई एलजीबीटीक्यू+ और एचआईवी समूहों पर छापेमारी की।
- समूहों को वैधता और फंडिंग से वंचित करने के नए नियम लागू किए गए।
- अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी समूहों ने इस कदम की कड़ी निंदा की।
इस्तांबुल के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस ने दो हफ्तों में पाँच से अधिक एलजीबीटीक्यू+ और एचआईवी सहायता समूहों के कार्यालयों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने बताया कि ये समूह "सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने" वाले कार्यों में लिप्त हैं।
इस कार्रवाई में समूहों की बैठक कक्ष, सूचना केंद्र और फंडिंग बैंकों का जब्ती शामिल है। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया, जबकि कुछ को देश से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाया गया।
तुर्की न्याय मंत्रालय ने इस कदम को "राष्ट्र की नैतिक सुरक्षा" के नाम पर उचित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे समूहों को "समाज में विभाजन और रोग प्रसार" का खतरा मानती है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच, ने इस कार्रवाई को "मानवाधिकारों के खिलाफ स्पष्ट उल्लंघन" कहा। उन्होंने तुर्की सरकार से तुरंत सभी प्रतिबंध हटाने और प्रभावित व्यक्तियों को न्याय दिलाने का आग्रह किया।
इतिहास में, तुर्की ने 2000 के दशक में एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों के लिए कई सुधार लागू किए थे, जिसमें समलैंगिकता को आपराधिक दण्ड से हटाना शामिल था। हालांकि, हाल के वर्षों में राष्ट्रीयवादी राजनीति के प्रभाव के कारण इन अधिकारों में क्रमिक कमी देखी गई है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this crackdown not only threatens the civil liberties of LGBTQ+ and HIV‑positive individuals in Turkey but also signals a broader regional shift towards authoritarian control over civil society groups.
"Such state‑driven repression erodes public health initiatives and deepens social stigma," says Dr. Leyla Şahin, a public‑health researcher at Istanbul University.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस कार्रवाई में सभी एलजीबीटीक्यू+ समूह शामिल हैं?
उत्तर: नहीं, केवल वे समूह जो सरकार ने "अवैध" माना है, उन्हें लक्षित किया गया है।
प्रश्न 2: अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर कैसे प्रतिक्रिया दे रहा है?
उत्तर: कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने तुर्की को अंतरराष्ट्रीय दबाव के तहत अपने नीतियों को पुनः विचार करने की अपील की है।