केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ भारत के इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को उनकी मातृभाषा के माध्यम से ही देश की समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
- अमित शाह ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भारत की संस्कृति और इतिहास के प्रति जागरूकता के रूप में परिभाषित किया।
- उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- हिंदी शब्द सिंधु शब्दकोश 2029 तक दुनिया का सबसे बड़ा शब्दकोश बनने की ओर अग्रसर है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मुंबई में आयोजित 6वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ केवल सीमाओं की रक्षा नहीं, बल्कि देश की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूकता पैदा करना है। शाह ने तर्क दिया कि भारत की विविध भाषाओं की आवाजें अलग हो सकती हैं, लेकिन राष्ट्रीय भावना सदैव एक होनी चाहिए।
मातृभाषा और शिक्षा का गहरा संबंध
शाह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि एक बच्चा अपने देश को केवल अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही सही ढंग से समझ सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस संकल्प का उल्लेख किया जिसके तहत देश को 'गुलामी की मानसिकता' से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा में अनिवार्य बनाना एक क्रांतिकारी कदम है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का ऐतिहासिक संदर्भ
गृह मंत्री ने बाल गंगाधर तिलक का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने गणेश उत्सव और शिवाजी महाराज की जयंती जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से देशभक्ति की लहर पैदा की थी। उन्होंने कहा कि तिलक ने समझा था कि सांस्कृतिक जागरूकता ही राष्ट्रवाद की नींव है।
हिंदी शब्द सिंधु: भाषाई एकता का सेतु
सम्मेलन के दौरान, शाह ने 'हिंदी शब्द सिंधु' की प्रगति साझा की। उन्होंने बताया कि जो शब्दकोश 51,000 शब्दों से शुरू हुआ था, वह अब 8 लाख शब्दों तक पहुंच गया है और 2029 तक दुनिया का सबसे बड़ा शब्दकोश बनने की क्षमता रखता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली और ओडिया जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के 50,000 से अधिक शब्दों को शामिल किया गया है, जिससे हिंदी अधिक लचीली और समावेशी बनी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार की यह भाषाई रणनीति केवल संचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'भाषाई वि-औपनिवेशीकरण' (Linguistic Decolonization) का एक बड़ा हिस्सा है। विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं को हिंदी के साथ एकीकृत करके, सरकार एक ऐसी भाषाई संरचना तैयार कर रही है जो राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है और अंग्रेजी के प्रभुत्व को कम करती है।
'राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य है।'
शाह ने यह भी उल्लेख किया कि अब छात्र IAS, IPS, JEE और NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में अपनी मातृभाषा में परीक्षा दे सकते हैं, जो शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Frequently Asked Questions
1. अमित शाह ने राजभाषा सम्मेलन में क्या मुख्य संदेश दिया?
उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने और भाषाई एकता के लिए राजनीतिक मतभेदों को त्यागने का संदेश दिया।
2. नई शिक्षा नीति (NEP) भाषाओं के संबंध में क्या करती है?
NEP प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा में अनिवार्य बनाती है और एक अतिरिक्त भारतीय भाषा सीखने पर जोर देती है।