गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गौली-धंगार और भंडारी समुदायों को उनके आरक्षण संबंधी मांगों पर आश्वासन दिया है। भाजपा इस रणनीतिक कदम के जरिए राज्य में बढ़ते राजनीतिक असंतोष को शांत करने की कोशिश कर रही है।
- मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने गौली-धंगार समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का वादा किया है।
- भंडारी समुदाय की 'कोटा के भीतर कोटा' की मांग पर ओबीसी आयोग में विचार किया जा रहा है।
- गोवा में जनजातीय आबादी लगभग 10.23% है, जो आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
- भाजपा द्वारा यह कदम दक्षिण गोवा में हालिया चुनावी हार के बाद राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने हाल ही में विधानसभा में घोषणा की कि गौली-धंगार समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के सबसे बड़े जाति समूहों में से एक, भंडारी समुदाय की 'कोटा के भीतर कोटा' की मांग पर भी सकारात्मक आश्वासन दिया है।
यह राजनीतिक हलचल तब देखी जा रही है जब भाजपा को राज्य के विभिन्न हिस्सों में, विशेषकर दक्षिण गोवा में, जनजातीय मतदाताओं के असंतोष का सामना करना पड़ा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को दक्षिण गोवा सीट पर मिली हार इस बात का संकेत थी कि आरक्षण और पहचान की मांगें चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि गोवा की राजनीति में जनजातीय और ओबीसी समुदायों का प्रभाव बहुत गहरा है। यदि भाजपा इन मांगों को समय पर पूरा करने में सफल रहती है, तो यह न केवल मौजूदा असंतोष को कम करेगा, बल्कि उन विधानसभा सीटों पर भी पकड़ मजबूत करेगा जहाँ इन समुदायों का वर्चस्व है।
आरक्षण की राजनीति अक्सर चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल देती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ मतदाता संख्या कम लेकिन प्रभाव अधिक है।
ऐतिहासिक रूप से, गौली-धंगार समुदाय लंबे समय से एसटी सूची में शामिल होने की मांग कर रहा है। हालांकि, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) ने पहले इस मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने अब केंद्र सरकार से इस मामले की समीक्षा करने का आग्रह किया है। सावंत के अनुसार, इस समुदाय में आदिम लक्षण और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान मौजूद है, जो उन्हें एसटी श्रेणी के योग्य बनाती है।
दूसरी ओर, भंडारी समुदाय ओबीसी श्रेणी के भीतर अपने लिए एक विशेष आरक्षण की मांग कर रहा है। यह समुदाय गोवा की कुल जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। उनकी मांग है कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए उनके लिए एक अलग कोटा निर्धारित किया जाए।
| समुदाय | मुख्य मांग | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| गौली-धंगार | ST (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा | प्रक्रिया पुनः शुरू की गई |
| भंडारी | OBC में कोटा के भीतर कोटा | ओबीसी आयोग में विचाराधीन |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: गौली-धंगार समुदाय की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: वे खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में मान्यता दिलाने की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: भंडारी समुदाय किस प्रकार के आरक्षण की मांग कर रहा है?
उत्तर: वे ओबीसी श्रेणी के भीतर अपने लिए एक विशिष्ट 'कोटा के भीतर कोटा' की मांग कर रहे हैं।