किसान मजदूर एकता मोर्चा (KMM) के नेतृत्व में किसानों ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह के कार्यालय के बाहर पांच दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। किसानों की 12 सूत्रीय मांगों में कर्ज माफी और आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेना शामिल है।
- किसान मजदूर एकता मोर्चा (KMM) ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह के कार्यालय के बाहर 5 दिवसीय धरना शुरू किया।
- किसानों की 12 सूत्रीय मांगों में कर्ज माफी, MSP पर खरीद और मुकदमों की वापसी शामिल है।
- सरकार द्वारा वार्ता न करने पर रेलवे ट्रैक और हाईवे जाम करने की चेतावनी दी गई है।
- बिजली कटौती और कोयले की कमी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया।
होशियारपुर, पंजाब: किसान मजदूर एकता मोर्चा (KMM) के बैनर तले किसानों ने सोमवार को पंजाब के कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह के कार्यालय के बाहर पांच दिवसीय धरना शुरू कर दिया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करने में विफल रहती है, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
यह विरोध प्रदर्शन केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है; KMM ने पंजाब के विभिन्न मंत्रियों के आवासों और कार्यालयों के बाहर धरने का आह्वान किया है। इस आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन (BKU) दोआबा, किसान मजदूर संघर्ष समिति (पिड्डी ग्रुप) और किसान मजदूर हितकारी सभा जैसे प्रमुख संगठन शामिल हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पंजाब में बढ़ता कृषि असंतोष राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। किसानों की मांगें केवल आर्थिक नहीं हैं, बल्कि वे कानूनी सुरक्षा और नीतिगत बदलावों की भी मांग कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
यदि सरकार ने जल्द ही संवाद का रास्ता नहीं निकाला, तो पंजाब में बड़े पैमाने पर रेल और सड़क जाम होने की प्रबल संभावना है।
BKU दोआबा के प्रदेश अध्यक्ष मंजीत सिंह राय ने कहा कि किसान संगठनों ने पहले ही पूरे पंजाब में जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंप दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार बातचीत से पीछे हटती है, तो 16 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी जिसमें रेलवे ट्रैक और राजमार्गों को अवरुद्ध करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने सरकार के सामने 12 सूत्रीय मांग पत्र रखा है। मुख्य मांगों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित करना।
- किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पूर्ण कर्ज माफी।
- आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए सभी पुलिस और रेलवे मामलों को वापस लेना।
- प्रीपेड बिजली मीटरों की स्थापना पर तत्काल रोक।
इसके अलावा, किसानों ने बिजली कटौती, कोयले की कमी और बीज अधिनियम 2025 जैसे विवादास्पद कानूनों का विरोध भी किया है। उन्होंने मांग की है कि जिन किसानों ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनी जान गंवाई है, उनके परिवारों को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा दिया जाए।
Frequently Asked Questions
1. किसानों की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांगों में कर्ज माफी, MSP पर फसलों की खरीद, और आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेना शामिल है।
2. आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस आंदोलन का नेतृत्व किसान मजदूर एकता मोर्चा (KMM) और विभिन्न किसान यूनियन कर रही हैं।