पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादलों के चचेरे भाई मेजर (रिटायर्ड) भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। यह कदम 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले अकाली दल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
- मेजर (रिटायर्ड) भूपिंदर सिंह ढिल्लों और उनके बेटे अमरवीर सिंह बावा भाजपा में शामिल हुए।
- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
- यह घटनाक्रम 2027 के पंजाब चुनावों से पहले भाजपा-अकाली दल गठबंधन की चर्चाओं के बीच हुआ है।
- ढिल्लों बादलों के परिवार के करीबी सदस्य रहे हैं और पूर्व में राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
पंजाब की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादलों के चचेरे भाई, मेजर (रिटायर्ड) भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने सोमवार को चंडीगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ उनके बेटे अमरवीर सिंह बावा ने भी भाजपा का साथ दिया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने उन्हें पार्टी में शामिल किया।
78 वर्षीय भूपिंदर ढिल्लों बादलों परिवार के एक वरिष्ठ और प्रभावशाली सदस्य माने जाते हैं। उन्होंने पूर्व में प्रकाश सिंह बादलों के राजनीतिक सचिव के रूप में कार्य किया था और गठबंधन सरकार के दौरान उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया गया था। ढिल्लों, पूर्व राज्यसभा सदस्य गुरराज सिंह बादलों के पुत्र हैं, जो प्रकाश सिंह बादलों के पिता रघुराज सिंह के छोटे भाई थे। उनका पैतृक घर बादल गांव में स्थित है, जो शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादलों के पुराने निवास के बिल्कुल बगल में है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ढिल्लों का भाजपा में जाना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह पंजाब में भाजपा की विस्तारवादी रणनीति का हिस्सा है। ढिल्लों को बादलों परिवार के पारंपरिक गढ़, लंबी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के एक मजबूत चेहरे के रूप में देखा जा सकता है। भाजपा का लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनावों में अपनी पैठ मजबूत करना है, और परिवार के भीतर से इस तरह का समर्थन उनकी रणनीति को बल देता है।
ढिल्लों का भाजपा में जाना अकाली दल के भीतर पारिवारिक एकजुटता और राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े करता है।
भूपिंदर ढिल्लों ने भाजपा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने संकेत दिया कि वह चुनावी राजनीति में फिर से सक्रिय हो सकते हैं और यहां तक कि उन्होंने अपने नाम के साथ 'बादल' शब्द जोड़ने का भी संकेत दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मन में अपने भतीजे और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादलों के प्रति कोई नाराजगी नहीं है।
भाजपा-अकाली दल गठबंधन की बदलती समीकरण
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच 2027 के चुनावों के लिए गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। दोनों दल दशकों तक सहयोगी रहे, लेकिन 2020 में केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल के अलग होने से यह रिश्ता टूट गया। 2022 के चुनावों में इस अलगाव का खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ा, जहां आम आदमी पार्टी ने पंजाब में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादलों के बीच हुई मुलाकात ने गठबंधन की चर्चाओं को फिर से हवा दी है। अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसे 'समय की मांग' बताया है। हालांकि, भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि नया गठबंधन पुराने जैसा नहीं होगा। भाजपा अब पंजाब में 'बड़े भाई' की भूमिका में आना चाहती है, जिसका अर्थ है अधिक सीटें और मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों कौन हैं?
वे प्रकाश सिंह बादलों के चचेरे भाई और पूर्व राज्य मंत्री हैं।
2. क्या भाजपा और अकाली दल फिर से गठबंधन कर रहे हैं?
हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों नेताओं के बीच हालिया मुलाकातों से गठबंधन की प्रबल संभावना दिख रही है।