चंडीगढ़ नगर निगम में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर है, जहाँ 2021 के चुनाव में जीते गए पार्षदों ने बार-बार अपनी पार्टियां बदली हैं। भाजपा इस राजनीतिक अस्थिरता का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरी है।
- 35 में से 13 पार्षदों ने अपना राजनीतिक दल बदला है।
- भाजपा सबसे बड़ा लाभार्थी रही, जिसके सदस्यों की संख्या 12 से बढ़कर 18 हो गई।
- पूनम, गुरचरणजीत सिंह और नेहा मसूत जैसे पार्षद कई बार दल बदलकर राजनीति कर रहे हैं।
चंडीगढ़ में आगामी नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दिसंबर 2021 के चुनावों में जो जनादेश जनता ने दिया था, वह अब पूरी तरह बदल चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचित पार्षदों ने अपनी पार्टियों के प्रति वफादारी को दरकिनार करते हुए बार-बार दल परिवर्तन किया है, जिससे निगम की पूरी संरचना ही बदल गई है।
इस राजनीतिक अस्थिरता में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी है। 2021 के चुनावों में भाजपा के पास 12 पार्षद थे, लेकिन दल बदलने वाले 13 पार्षदों में से 6 ने भाजपा का दामन थाम लिया, जिससे पार्टी की ताकत बढ़कर 18 हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि दल बदलने वाले सभी 13 पार्षद मूल रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) या कांग्रेस से निर्वाचित हुए थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चंडीगढ़ में हर साल होने वाले मेयर चुनाव इस राजनीतिक अस्थिरता को और अधिक संवेदनशील बना देते हैं। जब केवल एक या दो वोटों से मेयर का पद तय होता है, तो पार्षदों द्वारा किया गया दल परिवर्तन सीधे तौर पर निगम के नियंत्रण को प्रभावित करता है।
जब कोई उम्मीदवार पार्टी के प्रतीक पर जीतता है, तो क्या जनादेश केवल व्यक्ति का होता है या उस पार्टी और मतदाताओं का भी जिसने उस प्रतीक को चुना था?
पार्षदों के दल बदलने के पैटर्न को देखें तो कुछ नाम बार-बार चर्चा में रहे हैं। उदाहरण के लिए, पूनम का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है; वे AAP से BJP में गईं, फिर वापस AAP में आईं और अंततः फिर से BJP में शामिल हो गईं। इसी तरह, गुरचरणजीत सिंह और नेहा मसूत ने भी कई बार अपनी राजनीतिक निष्ठा बदली है।
| पार्टी | 2021 में सीटें | वर्तमान स्थिति (अनुमानित) |
|---|---|---|
| AAP | 14 | घटाव |
| BJP | 12 | 18 |
| Congress | 8 | घटाव |
विपक्ष ने इन बदलावों को 'हॉर्स-ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का नाम दिया है, जबकि पार्षद इसे अपनी विचारधारा या क्षेत्र के हितों के लिए लिया गया निर्णय बता रहे हैं। इस मुद्दे ने अब 'दल-बदल विरोधी कानून' को स्थानीय निकायों में लागू करने की मांग को भी फिर से जीवित कर दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: चंडीगढ़ में सबसे अधिक लाभ किस पार्टी को हुआ है?
उत्तर: भाजपा को सबसे अधिक लाभ हुआ है, क्योंकि 6 पार्षद उनके साथ शामिल हुए हैं।
प्रश्न 2: क्या पार्षदों के लिए दल-बदल विरोधी कानून है?
उत्तर: वर्तमान में चंडीगढ़ नगर निगम के लिए ऐसा कोई कड़ा तंत्र लागू नहीं है।