पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में 2021 चुनाव हिंसा के एक पीड़ित बीजेपी कार्यकर्ता के अवशेषों को कब्र से बाहर निकाला गया है। अदालत के आदेश पर हुई इस प्रक्रिया के बाद अब पोस्टमार्टम से मौत के असली कारणों का खुलासा होने की उम्मीद है।
- 2021 विधानसभा चुनाव हिंसा के दौरान मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता आस्तिक चंद्र दास के अवशेष निकाले गए।
- अदालत के आदेश पर मजिस्ट्रेट और परिजनों की मौजूदगी में कब्र से कंकाल निकाला गया।
- मृतक के परिवार ने मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है।
- परिजनों का आरोप है कि पुलिस के दबाव में बिना पोस्टमार्टम के शव को दफनाया गया था।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा में मारे गए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कार्यकर्ता, आस्तिक चंद्र दास, के कंकाल के अवशेषों को चार साल बाद उनकी कब्र से बाहर निकाला गया है। यह कार्रवाई स्थानीय अदालत के सख्त आदेश के बाद की गई है।
घटनाक्रम के अनुसार, आस्तिक चंद्र दास संदेशखाली के झांझनिया गांव के निवासी थे। आरोप है कि 2021 के चुनाव परिणामों के बाद जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थकों ने विजय जुलूस निकाला, तब उन पर जानलेवा हमला किया गया था। मृतक के बेटे, सुब्रत दास, ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमले के बाद उनके पिता को अस्पताल ले जाने से रोका गया और उन्हें घर पर ही दम तोड़ना पड़ा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह घटना पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा के गहरे और अनसुलझे जख्मों को फिर से उजागर करती है। एक राजनीतिक कार्यकर्ता के अवशेषों का वर्षों बाद निकलना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे न्याय की प्रक्रिया में देरी पीड़ितों के परिवारों के लिए मानसिक प्रताड़ना का कारण बनती है।
न्याय में देरी, न्याय से वंचित रखने के समान है; यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक विफलता का एक गंभीर उदाहरण है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अवशेषों को निकालने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। अब इन अवशेषों को फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या आस्तिक की मृत्यु प्राकृतिक थी या वह एक सुनियोजित हत्या का शिकार हुए थे।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह 2021 में कार्यकर्ताओं पर हुए अत्याचारों का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय पुलिस मूकदर्शक बनी रही और दोषियों को संरक्षण दिया गया।
Frequently Asked Questions
1. आस्तिक चंद्र दास की मौत कब हुई थी?
उनकी मृत्यु 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान हुई थी।
2. परिवार ने क्या मांग की है?
परिजनों ने इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।