कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अमेरिकी दबाव में आकर यूपीआई (UPI) लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे अंततः आम जनता की जेब पर बोझ पड़ेगा।
- सरकार ने ₹2,000 से कम के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने पर रोक लगाई है, लेकिन ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर स्पष्टता का अभाव है।
- राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिकी कंपनियों को लाभ पहुँचाने और डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए उठाया गया है।
- कांग्रेस का दावा है कि व्यापारियों पर लगने वाला शुल्क (MDR) अंततः ग्राहकों द्वारा सामान की कीमतों के रूप में चुकाया जाएगा।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुपचाप यूपीआई (UPI) लेनदेन पर शुल्क लगाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। हालिया अधिसूचना के बाद, गांधी ने कहा कि 'समझौतावादी' प्रधानमंत्री एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक रहे हैं।
विवाद की जड़ सरकार की एक नई अधिसूचना है, जिसमें कहा गया है कि बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता ₹2,000 से कम के यूपीआई और रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं ले सकते। हालांकि, कांग्रेस का तर्क है कि ₹2,000 से अधिक के उच्च-मूल्य वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने की संभावना बनी हुई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल तकनीकी बदलाव का नहीं है, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता का भी है। यदि ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका सीधा असर डिजिटल अर्थव्यवस्था की गति पर पड़ेगा। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि भले ही लेनदेन की मात्रा कम हो, लेकिन कुल मूल्य का लगभग 65% हिस्सा इन उच्च-मूल्य वाले लेनदेन से आता है।
'सरकार कहती है कि ग्राहकों से शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारियों पर लगाया गया बोझ अंततः ग्राहकों की जेब से ही निकलेगा।' - राहुल गांधी का विश्लेषण।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में किए गए संशोधनों ने उस वैधानिक गारंटी को हटा दिया है जो यूपीआई को मुफ्त रखती थी। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में इस सीमा को घटाकर दैनिक व्यक्तिगत लेनदेन पर भी शुल्क लगाया जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यूपीआई (UPI) को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा संचालित किया जाता है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक पहल है। अब तक, यूपीआई को एक शून्य-एमडीआर (Zero-MDR) नीति के तहत संचालित किया जाता रहा है, जिसका अर्थ है कि लेनदेन करने वालों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता था। अमेरिकी भुगतान कंपनियों ने लंबे समय से इस नीति का विरोध किया है।
सरकार का तर्क है कि साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए निरंतर निवेश की आवश्यकता है। सरकार के अनुसार, केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना भविष्य के विकास के लिए टिकाऊ नहीं है और एक आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल की आवश्यकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मुझे ₹2,000 से कम के यूपीआई लेनदेन के लिए शुल्क देना होगा?
नहीं, नई अधिसूचना के अनुसार ₹2,000 तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता।
प्रश्न 2: सरकार शुल्क क्यों लगाना चाहती है?
सरकार का कहना है कि साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए धन की आवश्यकता है।