मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के राजस्व मंत्री के रूप में कार्यरत के.ए. सेंगोट्टैयन की जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश जी.के. इलंथिरायन ने एआईएडिएमके के उम्मीदवार वी.बी. प्रभु की याचिका को अस्वीकार कर दी।
- सेंगोट्टैयन की जीत पर चुनाव याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज किया
- विरोधी उम्मीदवार वी.बी. प्रभु की याचिका को पर्याप्त साक्ष्य की कमी के कारण अस्वीकार किया गया
- 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद उच्च न्यायालय में 54 याचिकाएँ दर्ज हुईं
न्यायालय का निर्णय
मद्रास उच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के गोबिचेट्टिपालयम निर्वाचन क्षेत्र में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन की जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश जी.के. इलंथिरायन ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि याचिकाकर्ता ने पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए थे जो कोर्ट को पूर्ण परीक्षण की ओर ले जाता।
पृष्ठभूमि
सेंगोट्टैयन ने एआईएडिएमके से अलग होकर इस साल तमिलनाडु वेत्त्री क़ज़हगम (TVK) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उन्होंने 82,612 वोट प्राप्त किए, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के एन. नल्लासिवाम को 65,992 वोट मिले। एआईएडिएमके के उम्मीदवार वी.बी. प्रभु को 56,232 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
याचिका की मुख्य वजहें
प्रभु ने कई कारणों से जीत को चुनौती दी, जिनमें मतगणना में अनियमितताओं और मतपत्रों की गिनती में त्रुटियों का दावा शामिल था। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं प्रस्तुत किए थे, जिससे एक पूर्ण परीक्षण की आवश्यकता नहीं रही।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस निर्णय से तमिलनाडु की राजनीति में वैधता और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती का संदेश मिलता है, विशेषकर जब कई याचिकाएँ दायर की गई थीं। यह भविष्य में चुनावी विवादों के समाधान में एक महत्त्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।
"ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लोकतंत्र की जड़ को मजबूत करती है," कहते हैं चुनाव कानून विशेषज्ञ डॉ. रवींद्रन.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह फैसला सेंगोट्टैयन के भविष्य के राजनीतिक करियर को प्रभावित करेगा?
उत्तर: वर्तमान में कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं दिख रहा; न्यायालय का फैसला उनके जीत को स्थायी बनाता है।
प्रश्न 2: अन्य याचिकाओं का क्या भविष्य है?
उत्तर: उच्च न्यायालय ने कई याचिकाओं को अस्वीकार किया है, लेकिन कुछ मामलों में आगे की सुनवाई जारी रह सकती है।