महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि राज्य सरकार आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। यह कदम न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के बाद उठाया जाएगा।
- महाराष्ट्र सरकार शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है।
- न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति वर्तमान में सिफारिशों पर काम कर रही है।
- यह कदम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के बाद आया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। फडणवीस के अनुसार, राज्य सरकार नागपुर में आयोजित होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान इस ऐतिहासिक विधेयक को सदन के पटल पर लाने की योजना बना रही है।
इस प्रक्रिया के केंद्र में एक सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं। इस समिति को जुलाई में गठित किया गया था और इसे अपनी विस्तृत सिफारिशें सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया था। समिति में पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश आरसी चव्हाण और एसजी मेहारे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संवैधानिक विशेषज्ञ रमेश पाटांगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल जैसे दिग्गज शामिल हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि महाराष्ट्र में UCC का लागू होना न केवल राज्य के कानूनी ढांचे को बदलेगा, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में भी कार्य कर सकता है। यह कदम व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) के स्थान पर एक समान कानूनी ढांचे की ओर बढ़ने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है।
समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन सामाजिक समरसता और कानूनी एकरूपता की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि फडणवीस की यह घोषणा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सरकारें 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य रखती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में समान नागरिक संहिता का मुद्दा दशकों पुराना है। संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। लंबे समय से बहस चल रही है कि क्या यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और लैंगिक समानता के बीच संतुलन बना पाएगा।
Frequently Asked Questions
1. महाराष्ट्र में UCC कब तक लागू हो सकता है?
संभावित रूप से, शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान विधेयक पेश किया जा सकता है, बशर्ते न्यायमूर्ति देसाई की समिति समय पर रिपोर्ट सौंप दे।
2. UCC समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश, पूर्व मुख्य सचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनका नेतृत्व न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं।