कर्नाटक में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को गाने के सरकारी आदेश के खिलाफ शिवमोग्गा के भाजपा विधायक एस.एन. चन्नबसप्पा ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने लोकतंत्र दिवस के कार्यक्रम से वॉकआउट कर अपना विरोध दर्ज कराया।

  • शिवमोग्गा के भाजपा विधायक एस.एन. चन्नबसप्पा ने सरकारी कार्यक्रम से वॉकआउट किया।
  • विवाद का कारण वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों का गायन है।
  • कर्नाटक सरकार ने राजकीय समारोहों में केवल दो छंदों के गायन का आदेश दिया है।
  • कांग्रेस और दलित संघर्ष समिति ने विधायक के इस कदम की आलोचना की है।

शिवमोग्गा, कर्नाटक: कर्नाटक में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शिवमोग्गा के भाजपा विधायक एस.एन. चन्नबसप्पा ने मंगलवार को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस' के कार्यक्रम के दौरान विरोध स्वरूप कार्यक्रम से वॉकआउट कर दिया। विधायक का यह कड़ा कदम सरकार के उस हालिया आदेश के विरोध में था, जिसमें राजकीय समारोहों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को गाने का निर्देश दिया गया है।

विवाद की जड़: सरकारी आदेश

घटनाक्रम के अनुसार, यह कार्यक्रम शिवमोग्गा के डॉ. बी.आर. अंबेडकर भवन में आयोजित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता स्वयं विधायक चन्नबसप्पा कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत में जब 'नाडगे गीत' और 'वंदे मातरम' प्रस्तुत किए गए, तो विधायक ने पाया कि राष्ट्रीय गीत को केवल पहले दो छंदों तक ही सीमित रखा गया है। चन्नबसप्पा ने तुरंत आपत्ति जताई और मांग की कि गीत का पूर्ण पाठ किया जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम की रूपरेखा राज्य सरकार के मौजूदा निर्देशों के अनुसार तैयार की गई थी। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल प्रथम दो छंदों का ही गायन किया जाना अनिवार्य है। इस स्पष्टीकरण के बाद, विधायक ने यह कहते हुए कार्यक्रम छोड़ दिया कि वे ऐसे किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकते जहाँ राष्ट्रीय गीत को अधूरा छोड़ा जाए।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तीखी बहस

विधायक के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। दलित संघर्ष समिति के राज्य संयोजक एम. गुरुमूर्ति सहित अन्य उपस्थित नेताओं ने विधायक की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह वॉकआउट करना लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकारी केवल सरकारी आदेशों का पालन कर रहे थे।

वहीं, शिवमोग्गा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एच.सी. योगेश ने भी भाजपा विधायक के इस व्यवहार की कड़ी निंदा की। योगेश ने सवाल उठाया कि क्या विधायक को पूरा गीत गाना आता है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से संविधान और उसके निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विरोधी की रही है और विधायक का यह कृत्य लोकतंत्र और संविधान के प्रति अनादर प्रदर्शित करता है।

ऐतिहासिक संदर्भ: वंदे मातरम का महत्व

वंदे मातरम, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवाद का एक शक्तिशाली प्रतीक रहा है। गीत के विभिन्न छंदों के गायन को लेकर समय-समय पर सांस्कृतिक और राजनीतिक बहसें होती रही हैं। भारत सरकार ने पहले भी राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और उनके सही उच्चारण/गायन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा और सरकारी प्रोटोकॉल के बीच का यह संघर्ष भारतीय राजनीति में सांस्कृतिक पहचान के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
Did You Know?: वंदे मातरम को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सबसे प्रभावशाली देशभक्ति गीतों में से एक माना जाता था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: विवाद का कारण कर्नाटक सरकार का वह आदेश है जिसमें राजकीय समारोहों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को गाने का निर्देश दिया गया है।

प्रश्न 2: विधायक ने क्या कदम उठाया?
उत्तर: भाजपा विधायक एस.एन. चन्नबसप्पा ने राष्ट्रीय गीत के अधूरे गायन के विरोध में लोकतंत्र दिवस के कार्यक्रम से वॉकआउट कर दिया।