डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की उस कड़ी आलोचना की है जिसने मिडटर्म चुनावों से पहले मेल-इन वोटिंग पर प्रतिबंध लगाने की उनकी मांग को खारिज कर दिया। ट्रंप ने न्यायाधीशों की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'देश के साथ विश्वासघात' करने वाला बताया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने मेल-इन वोटिंग पर प्रतिबंध लगाने के ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
- ट्रंप ने न्यायाधीशों पर 'वामपंथी प्रभाव' में काम करने और देश को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया।
- मिडटर्म चुनावों के लिए राज्यों में मौजूदा डाक मतदान प्रणाली यथावत रहेगी।
- ट्रंप ने उन न्यायाधीशों की भी आलोचना की जिन्हें उन्होंने स्वयं नियुक्त किया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला बोला। कोर्ट ने आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले मेल-इन वोटिंग (डाक द्वारा मतदान) को सीमित करने के ट्रंप प्रशासन के प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों की निष्ठा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट द्वारा सोमवार देर रात जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित प्रतिबंधों को अदालत में टिकना मुश्किल होगा, कम से कम इस साल के चुनावों के लिए। इसका अर्थ यह है कि राज्यों में वर्षों से चली आ रही डाक मतदान प्रणाली बिना किसी बदलाव के जारी रहेगी। ट्रंप प्रशासन चाहता था कि यूएस पोस्टल सर्विस को यह तय करने में केंद्रीय भूमिका दी जाए कि किसे मतपत्र प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन चुनाव अधिकारियों ने समय की कमी और मौजूदा प्रणाली की सुरक्षा का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटनाक्रम केवल एक कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते टकराव का प्रतीक है। ट्रंप द्वारा अपने द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों की भी आलोचना करना यह दर्शाता है कि वे न्यायिक नियुक्तियों को व्यक्तिगत निष्ठा के चश्मे से देखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है, भले ही यह राजनीतिक रूप से विवादास्पद हो।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "सुप्रीम कोर्ट का सही काम करने में असमर्थता और अनिच्छा इतिहास में नकारात्मक रूप से दर्ज होगी।" उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत 'रेडिकल लेफ्ट' (कट्टर वामपंथियों) के दबाव में काम कर रही है, जिससे अमेरिका सौ साल पीछे चला गया है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि न्यायाधीश अब अपने मूल स्वरूप का केवल एक 'शेल' (खोखला रूप) मात्र रह गए हैं।
ऐतिहासिक रूप से, ट्रंप ने मेल-इन वोटिंग का कड़ा विरोध किया है और 2020 के चुनाव में अपनी हार के लिए इसे गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेल-इन वोटिंग में धोखाधड़ी की दर अत्यंत नगण्य है।
| पक्ष | ट्रंप प्रशासन का तर्क | सुप्रीम कोर्ट/राज्य अधिकारी का तर्क |
|---|---|---|
| वोटिंग प्रक्रिया | मेल-इन वोटिंग को नियंत्रित किया जाना चाहिए। | मौजूदा प्रणाली सुरक्षित और समय की कमी है। |
| नियुक्ति का आधार | न्यायाधीशों को राष्ट्रपति के प्रति वफादार होना चाहिए। | न्यायाधीश संविधान और कानून के प्रति उत्तरदायी हैं। |
Frequently Asked Questions
1. क्या मेल-इन वोटिंग अब बंद हो जाएगी?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मौजूदा मेल-इन वोटिंग प्रक्रिया जारी रहेगी।
2. ट्रंप ने किन न्यायाधीशों का नाम लिया?
ट्रंप ने उन न्यायाधीशों पर निशाना साधा जो उनके पक्ष में नहीं थे, जबकि उन्होंने सैम अलीतो और क्लेरेंस थॉमस जैसे न्यायाधीशों को 'लीजेंड' भी कहा।