राज्यसभा सांसद के. लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता (UCC) का लक्ष्य धार्मिक भेदभाव को समाप्त करना और सभी नागरिकों को समान अधिकार देना है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम बताया।
- UCC किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भेदभाव मिटाना और समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करना है।
- के. लक्ष्मण ने ओवैसी के बयानों को राजनीतिक लाभ के लिए भ्रामक बताया।
- गोवा का सिविल कोड इस बात का प्रमाण है कि यह मॉडल सफल हो सकता है।
बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद के. लक्ष्मण ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) न तो 'मुस्लिम विरोधी' है और न ही 'हिंदू विरोधी'। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह किसी विशेष धर्म या समुदाय को लक्षित करने के लिए नहीं, बल्कि भारतीय समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है।
लक्ष्मण ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी 'समान अधिकार, समान कानून और प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए समान सम्मान' के सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उल्लेख किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'एक राष्ट्र, समान नागरिक अधिकार' की अवधारणा को मजबूत करने के उद्देश्य से इस मुद्दे को उठाया है, ताकि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में भेदभाव को बढ़ावा न दिया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि UCC का मुद्दा भारत में केवल कानूनी नहीं, बल्कि गहरा सामाजिक और राजनीतिक है। जहाँ एक ओर इसे लैंगिक न्याय के लिए आवश्यक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे धार्मिक पहचान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। लक्ष्मण का बयान इस बहस को कानूनी समानता की ओर मोड़ने का प्रयास है।
UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों के माध्यम से होने वाले भेदभाव को समाप्त कर लैंगिक न्याय को सुदृढ़ करना है।
इस दौरान, लक्ष्मण ने एआईएमआईएम (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना करते हुए उनके बयानों को 'झूठा और निराधार' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी राजनीतिक लाभ के लिए UCC की बहस को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ओवैसी से आग्रह किया कि वे लोगों के बीच अनावश्यक डर और आशंका पैदा करने के बजाय, महिला सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय जैसे सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करें।
उदाहरण के तौर पर, लक्ष्मण ने गोवा के सिविल कोड का संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि पुर्तगाली शासन से मुक्ति के बाद भी गोवा में यह कानून लागू रहा और बाद में संसद द्वारा इसे मान्यता दी गई। भारतीय न्यायालयों ने भी गोवा सिविल कोड को भारत के कानूनी ढांचे के हिस्से के रूप में स्वीकार किया है।
राज्य भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने भी एक अलग बयान में UCC का समर्थन करते हुए इसे 'समय की मांग' बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इसे पूरे देश में लागू करेगी, क्योंकि यह किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी के हित में है।
Frequently Asked Questions
1. क्या UCC सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों को बदल देगा?
UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है, जो विवाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों में समानता सुनिश्चित करेगा।
2. गोवा में UCC पहले से ही क्यों है?
गोवा में पुर्तगाली शासन के दौरान लागू कानून को स्वतंत्रता के बाद भी बनाए रखा गया और भारतीय संसद द्वारा मान्यता दी गई।