भारी वर्षा के कारण येडाकुमारी और शिर्वागिलु स्टेशनों के बीच ट्रैक पर भूस्खलन हुआ, जिससे कई प्रमुख ट्रेनों में देरी और रद्दीकरण हुआ। दक्षिण पश्चिम रेलवे ने राहत सामग्री वाला ट्रेन भेजा और यात्रियों के लिये कैटरिंग व्यवस्था की।
मुख्य बिंदु
- भारी बारिश से ट्रैक पर भूस्खलन
- कई ट्रेनों में रुकावट और रद्दीकरण
- रिकवरी कार्य जारी, राहत सामग्री ट्रेन पहुंची
शिवमोगा, 2 अगस्त 2026 – दक्षिण पश्चिम रेलवे के मायसूर डिवीजन ने रविवार को येडाकुमारी और शिर्वागिलु स्टेशनों के बीच ट्रैक से मलबा हटाना शुरू किया। यह कार्य शनिवार रात 8.45 बजे शुरू हुए भूस्खलन के बाद शुरू किया गया, जो तेज़ बारिश के कारण हुआ था।
रेलवे ने तुरंत एक राहत सामग्री वाली ट्रेन को प्रभावित स्थान पर भेजा ताकि ट्रैक की सफाई और मरम्मत कार्य तेज़ी से हो सके। साथ ही हसन, सुब्रह्मण्य रोड, शिर्वागिलु और बंटवाल स्टेशनों पर यात्रियों के लिये कैटरिंग की व्यवस्था की गई।
दक्षिण पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, मनजुनाथ कानामाडी ने बताया कि लगातार भूस्खलन के कारण मरम्मत कार्य अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है। उन्होंने कहा, “सुरक्षा कारणों से हम सभी कदम सावधानीपूर्वक उठा रहे हैं।”
भूस्खलन के कारण कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों को रुकना पड़ा: मंगलुरु‑विजयपुरा एक्सप्रेस (17378) शिर्वागिलु पर 7.58 pm पर रुका, मुर्देश्वर‑एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस (16586) सुब्रह्मण्य रोड पर 8.50 pm पर रुका, और कोझिकोडे‑केएसआर बेंगलुरु एक्सप्रेस (16512) नेरलाकटे पर 9.56 pm पर रुका।
कुल मिलाकर, मंगलुरु‑येशवंतपुरु एक्सप्रेस (16540) और येशवंतपुरु‑मंगलुरु जंक्शन एक्सप्रेस (16575) को दो दिनों के लिए रद्द कर दिया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सकलेशपुर तालु, कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्थित, मॉनसून के दौरान अक्सर भूस्खलन की समस्या का सामना करता रहा है। पिछले वर्षों में भी इसी मार्ग पर कई बार इसी तरह की बाधाएँ आई हैं, जिससे रेलवे को नियमित रूप से ट्रैक की मजबूती बढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस प्रकार के भूस्खलन न केवल यात्रियों के समय-सारिणी को बिगाड़ते हैं, बल्कि आर्थिक नुकसान और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान भी उत्पन्न करते हैं। समय पर राहत सामग्री की डिलीवरी और यात्रियों के लिये कैटरिंग जैसी व्यवस्थाएँ संकट प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
"भूस्खलन वाले क्षेत्रों में निरंतर निगरानी और शीघ्र प्रतिक्रिया प्रणाली ही भविष्य में बड़े हादसों को रोक सकती है," कहते हैं रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रवींद्रन पांडे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या प्रभावित ट्रैक पर फिर से भूस्खलन की संभावना है?
उत्तर: मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है, इसलिए रेलवे सतत निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय कर रहा है।
प्रश्न 2: यात्रियों को रद्द हुई ट्रेनों का वैकल्पिक मार्ग कैसे मिलेगा?
उत्तर: रेलवे ने विशेष बस सेवाएँ और वैकल्पिक ट्रेन विकल्प प्रदान किए हैं, जो प्रत्येक स्टेशन पर सूचना बोर्डों में उपलब्ध हैं।