केंद्र सरकार ने गुम्मीडीपोंडी-गुडूर रेल खंड में तीसरी और चौथी लाइन बिछाने के ₹2,229 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। तिरुपति सांसद एम. गुरुमूर्ति ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए गेम-चेंजर बताया है।

  • गुम्मीडीपोंडी-गुडूर खंड में 90 किमी लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण होगा।
  • कुल परियोजना लागत ₹2,229 करोड़ है और इसे 4 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।
  • इस परियोजना से चेन्नई, विजयवाड़ा और तिरुपति के बीच रेल यातायात का दबाव कम होगा।
  • परियोजना में स्वर्णमुखी नदी पर 360 मीटर लंबा एक मेगा ब्रिज शामिल है।

केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण गुम्मीडीपोंडी-गुडूर रेल खंड में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है।

तिरुपति के सांसद एम. गुरुमूर्ति ने इस फैसले का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र में विकास की नई लहर आएगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए बल्कि औद्योगिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परियोजना का विस्तृत विवरण

₹2,229 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 90 किमी की दूरी पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। यह खंड चेन्नई-कोलकाता मुख्य रेल मार्ग का हिस्सा है। परियोजना की समय सीमा चार वर्ष निर्धारित की गई है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य गुडूर जंक्शन को भीड़भाड़ से मुक्त करना है, जो वर्तमान में चेन्नई, विजयवाड़ा और तिरुपति जाने वाली ट्रेनों के लिए एक अत्यधिक व्यस्त केंद्र है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना केवल रेल लाइनों के बारे में नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत के आर्थिक गलियारे को मजबूत करने के बारे में है। इस क्षेत्र में श्रीहरिकोटा का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, कृष्णपट्टनम बंदरगाह और श्री सिटी औद्योगिक क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण केंद्र स्थित हैं। बेहतर रेल कनेक्टिविटी इन केंद्रों की दक्षता को कई गुना बढ़ा देगी।

यह रेल विस्तार दक्षिण भारत के औद्योगिक और अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों के बीच एक जीवन रेखा साबित होगा।

इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से, यह एक बड़ी चुनौती है। परियोजना के हिस्से के रूप में 21 प्रमुख पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें स्वर्णमुखी नदी पर 360 मीटर लंबा एक विशाल पुल शामिल है। इसके अलावा, 127 छोटे पुल और 34 ओवरब्रिज/अंडरब्रिज बनाए जाएंगे ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गुम्मीडीपोंडी-गुडूर खंड लंबे समय से रेल यातायात के दबाव का सामना कर रहा है। चेन्नई-कोलकाता रूट भारत के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक है। जैसे-जैसे औद्योगिक मांग और यात्रियों की संख्या बढ़ रही थी, मौजूदा दोहरी लाइनों पर दबाव असहनीय होता जा रहा था, जिससे अक्सर ट्रेनों में देरी होती थी।

Did You Know?: इस रेल मार्ग के पास पुलिकट झील और नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य स्थित हैं, जो इसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील बनाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस परियोजना का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य लाभ गुडूर जंक्शन पर ट्रेनों की भीड़ कम करना और चेन्नई, तिरुपति एवं विजयवाड़ा के बीच यात्रा के समय को कम करना है।

प्रश्न 2: इस परियोजना को पूरा होने में कितना समय लगेगा?
उत्तर: सरकार के लक्ष्य के अनुसार, इस परियोजना को चार वर्षों के भीतर पूरा करने की योजना है।