अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की डिजिटल आईडी बंद कर दी है, क्योंकि चढ़ावा चोरी मामले की विशेष जांच (SIT) में आईडी दुरुपयोग का खुलासा हुआ है। यह कदम अनधिकृत वीआईपी पास जारी करने को रोकने और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

वीडियो लोड हो रहा है...

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों—चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव—की डिजिटल पहचान (डिजिटल आईडी) को तुरंत निष्क्रिय कर दिया है। यह कदम तब आया जब चढ़ावा चोरी के संबंध में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने इन आईडी का दुरुपयोग कर अनधिकृत वीआईपी दर्शन पास जारी करने के आरोपों को उजागर किया।

पृष्ठभूमि और जांच की स्थिति

2020 में शुरू हुई राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया के साथ ही कई दान और चढ़ावा (भेंट) के लेन‑देन भी बढ़े। 2025 में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया, जिसमें उच्च मूल्य के दान के साथ जुड़ी वस्तुओं का अनधिकृत रूप से हरण बताया गया। इस पर केंद्र सरकार ने एक विशेष जांच टीम गठित की, जिसका मुख्य उद्देश्य दान के प्रवाह, बैंक खातों की जाँच और डिजिटल प्रक्रियाओं की पारदर्शिता की समीक्षा करना था।

डिजिटल आईडी का दुरुपयोग

जांच के दौरान पता चला कि ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी डिजिटल आईडी का उपयोग करके सैकड़ों वीआईपी पास अनधिकृत रूप से जारी किए। इन पासों के माध्यम से धनी दानदाताओं को प्राथमिकता दी जा रही थी, जबकि सामान्य भक्तों को अक्सर देर से प्रवेश मिल रहा था। विशेष रूप से, एक मध्यस्थ—टिन्नू यादव—ने इन पासों को बेचकर बड़ी रकम कमाई की, जिससे चढ़ावा चोरी के आर्थिक नुकसान में इजाफा हुआ।

निष्क्रिय करने का कारण और प्रभाव

डिजिटल आईडी निष्क्रिय होने के बाद, अब इन तीनों व्यक्तियों के नाम पर ‘सुगम’ या ‘विशिष्ट दर्शन’ पास जारी नहीं किए जा सकेंगे। ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन के नेतृत्व में नया प्रशासन इस कदम को मंदिर की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दानकर्ताओं के विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए आवश्यक मानता है। साथ ही, इस कार्रवाई के साथ 30 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, जिससे संभावित धन शोधन को रोकने में मदद मिलेगी।

भविष्य की संभावनाएँ

विशेष जांच टीम ने अभी तक पूरी रिपोर्ट नहीं दी है, परन्तु संकेत मिलता है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के करीबी सहयोगियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। यदि आगे और साक्ष्य सामने आते हैं तो अतिरिक्त गिरफ्तारी या कानूनी कार्यवाही की संभावना बढ़ रही है। इस बीच, ट्रस्ट ने सभी डिजिटल प्रक्रियाओं की पुनः समीक्षा का आदेश दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी ही चूक न हो।

राम मंदिर ट्रस्ट की यह कड़ी कार्रवाई धार्मिक संस्थानों में तकनीकी सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है, और यह संकेत देती है कि प्रशासनिक लापरवाही के लिए कोई अपवाद नहीं रहेगा।