आयोध्या में राम मंदिर के दान प्रबंधन में हो रही अनियमितताओं की जांच में आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने बताया कि आगे भी कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं और जांच का दायरा बढ़ सकता है।
आयोध्या (उत्तर प्रदेश) – राम मंदिर ट्रस्ट के दान प्रबंधन में हुए कथित गबन की जांच ने आठ व्यक्तियों को पुलिस हिरासत में ले लिया है। इन आरोपियों में मंदिर के कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड और नकद गिनती प्रक्रिया में शामिल लोग शामिल हैं। इस मामले ने भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक पर दान संग्रह के प्रबंधन में गंभीर कमियों को उजागर किया है।
अभियोजन की पृष्ठभूमि
भारी रकम वाले दान के गबन की शिकायत राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज करवाई। पुलिस ने आठ आरोपियों को पूछताछ के बाद ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा। उनका नाम है: राम शंकर यादव (उपनाम टिन्नू यादव), मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, सुब्हाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और राम शंकर मिश्रा।
राम शंकर मिश्रा का केस
27 वर्षीय राम शंकर मिश्रा दान गिनती प्रक्रिया में काम करते थे। उनका परिवार आयोध्या के रानी बाग इलाके में स्थित राम साखा बगिया मंदिर में रहता है। उनके पिता छड्डू लाल मिश्रा हनुमानगढ़ी मंदिर में कीर्तन करते हैं। परिवार ने आरोपों से दूरी बना ली है, केवल भाभी साधना मिश्रा ने मीडिया को बात करने की अनुमति दी। उन्होंने बताया कि मिश्रा की आय लगभग 16,000‑17,000 रुपये थी, जबकि कैमरा काम से 4,000‑5,000 रुपये ही मिलते थे।
पुलिस के सबूत और बरामदियां
टेम्पल की काउंटिंग रूम की सीसीटीवी फुटेज में मिश्रा को नकद लेता हुआ दिखाया गया, जिससे उनकी हिरासत हुई। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ पैसे लिए थे, पर बाद में ट्रस्ट को वापस कर दिया। पुलिस ने 7,32,170 रुपये नकद और कुछ आभूषण एक लॉकर से बरामद किए।
टिन्नू यादव – प्रभावशाली नाम
राम शंकर यादव, जिन्हें टिन्नू यादव के नाम से भी जाना जाता है, स्थानीय लोगों और पत्रकारों के अनुसार मंदिर प्रबंधन में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक हैं। उनके पास वॉकी‑टॉकी था और वह गिनती कर्मचारियों तथा निजी सुरक्षा कर्मियों को निर्देश देते थे। उनके परिवार का पता स्वर्ग द्वार में है, लेकिन उन्होंने मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।
अन्य आरोपियों की भूमिका
सुब्हाष श्रीवास्तव, एक सेवानिवृत्त कैनरा बैंक कैशियर, स्वयंसेवक रूप में मंदिर में काम कर रहे थे। अन्य आरोपियों में मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा आदि शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारियां दान संग्रह, सुरक्षा और लेखा‑जोखा से संबंधित थीं।
पुलिस ने कहा कि जांच अभी प्रारम्भिक चरण में है और आगे भी कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यदि अतिरिक्त सबूत मिलते हैं तो केस का दायरा और विस्तृत हो सकता है।