विजयवाड़ा के इन्द्रकीलाद्रि पर तीन दिवसीय सकंबरी उत्सव का समापन हुआ। इस दौरान लगभग 2.5 लाख श्रद्धालुओं ने देवी के अलौकिक स्वरूप के दर्शन किए।
मुख्य बातें
- तीन दिवसीय सकंबरी उत्सव का गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भव्य समापन।
- देवी के श्रृंगार के लिए 45 टन फल, सब्जियां और हरी पत्तेदार सब्जियों का उपयोग।
- देश में समय पर वर्षा और किसानों की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना।
- लगभग 2.5 लाख श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए।
विजयवाड़ा स्थित श्री दुर्गा मल्लेश्वर स्वामी वरला देवस्थानम में तीन दिवसीय सकंबरी उत्सव का बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 'महापूर्णाहुति' के साथ समापन हुआ। इन्द्रकीलाद्रि की पहाड़ियों पर आयोजित इस उत्सव ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया।
उत्सव के अंतिम दिन, भक्तों ने देवी श्री कनक दुर्गा के सकंबरी देवी अवतार के दर्शन किए। इस अवसर पर देवी को विभिन्न प्रकार के फलों, हरी पत्तेदार सब्जियों, सब्जियों और सूखे मेवों से अत्यंत भव्य रूप में सजाया गया था। मंदिर परिसर का दृश्य प्रकृति और भक्ति के अद्भुत संगम जैसा प्रतीत हो रहा था।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, सकंबरी उत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है। यह त्योहार कृषि चक्र और जल संसाधनों के महत्व को रेखांकित करता है, जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है।
सकंबरी देवी का रूप हमें सिखाता है कि जीवन का आधार प्रकृति और उसके द्वारा दिए गए पोषण में निहित है।
मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष बोरा राधाकृष्ण और कार्यकारी अधिकारी वी.के. सीना नायक ने बताया कि किसानों और भक्तों द्वारा दान किए गए लगभग 45 टन कृषि उत्पादों का उपयोग सजावट के लिए किया गया। इस दौरान समय पर वर्षा, भरपूर फसल और किसानों के कल्याण के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सकंबरी देवी को पोषण और भोजन की देवी के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पृथ्वी पर अकाल की स्थिति उत्पन्न हुई थी, तब देवी ने वनस्पतियों और फलों के माध्यम से जीवन को पुनर्जीवित किया था। यही कारण है कि इस उत्सव में कृषि उत्पादों का विशेष महत्व है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सकंबरी उत्सव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और अच्छी वर्षा व कृषि समृद्धि के लिए प्रार्थना करना है।
2. इस वर्ष कितने श्रद्धालु शामिल हुए?
अनुमान के अनुसार, इस तीन दिवसीय उत्सव में लगभग 2.5 लाख श्रद्धालुओं ने भाग लिया।