असम क्रिश्चियन फोरम ने विदेशी योगदान (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन को ‘ड्रैकोनियन’ कहकर खारिज किया, क्योंकि इससे कई स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और आदिवासी संस्थाओं की संपत्ति जब्त हो सकती है। फोरम ने न्यायसंगत संशोधन की मांग की और मौजूदा 2010 के कानून को बरकरार रखने का आग्रह किया।

मुख्य बिंदु

  • प्रस्तावित संशोधन में विदेशी योगदान से निर्मित संपत्ति की जब्ती
  • डिज़ाइनेटेड अथॉरिटी को अनिश्चित शक्ति
  • सिविल समाज और धार्मिक संस्थाओं पर गंभीर प्रभाव

फोरम का स्पष्ट विरोध

असम क्रिश्चियन फोरम ने केंद्र और पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के सांसदों से विदेशी योगदान (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन को रद्द करने की अपील की। फोरम ने कहा कि यह संशोधन असमान्य रूप से ‘ड्रैकोनियन’ है और गरीब, दलित, आदिवासी और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के हित में काम करने वाले संस्थानों को नुकसान पहुँचा सकता है।

प्रस्तावित बिल के मुख्य प्रावधान

नए बिल में 1976 के मूल अधिनियम के बाद विदेशी योगदान से निर्मित सभी स्थायी और अस्थायी संपत्ति को जब्त करने, एक नई डिज़ाइनेटेड अथॉरिटी को इन संपत्तियों का प्रबंधन देने और गैर‑पंजीकृत संगठनों के शेष फंड को भारत के समेकित कोष में ट्रांसफर करने की धारा शामिल है। यह अथॉरिटी बिना स्पष्ट मानदंडों के किसी भी सरकारी निकाय को संपत्ति बेच सकती है।

फोरम के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

फोरम के प्रवक्ता एलन ब्रूक्स ने कहा, “न्याय की बुनियादी सिद्धांतों के अनुसार दंड को अपराध के अनुपात में होना चाहिए। अधिकांश संगठनों को तकनीकी त्रुटियों के कारण पंजीकरण रद्द किया गया है, जबकि केवल कुछ ही भ्रष्टाचार के कारण दंडित हुए हैं। इस प्रकार की जब्ती असंगत और अनुचित है।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

FCRA 2010 को विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन पिछले दशक में कई बार संशोधन की मांगें उठी हैं। 2015 और 2020 में हुए बदलावों ने पंजीकरण प्रक्रिया को कठोर बनाया, परंतु संपत्ति की जब्ती जैसी सख़्त धारा नहीं जोड़ी गई थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि इस बिल को पारित किया गया तो असम और पूर्वोत्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और नर्सिंग संस्थाएँ बंद हो सकती हैं, जिससे स्थानीय जनता का अत्यधिक नुकसान होगा।

सिविल समाज के विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह: “यह कदम मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है और धार्मिक स्वतंत्रता को खतरे में डालता है।”
क्या आप जानते हैं?: 2024 में केवल 12,000 से कम NGOs को ही विदेशी फंडिंग की अनुमति मिली थी, जबकि कुल मिलाकर 15,000 से अधिक संगठनों को अनुमति नहीं दी गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. क्या यह बिल सभी धार्मिक संस्थाओं को प्रभावित करेगा? – हाँ, प्रस्तावित प्रावधान सभी संस्थाओं पर समान रूप से लागू होते हैं।
  2. फोरम ने कौन से वैकल्पिक समाधान सुझाए हैं? – फोरम ने मौजूदा FCRA 2010 में न्यायसंगत संशोधन की माँग की है, न कि नई ‘जाब्त’ वाली विधि।