दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में नाग पंचमी का त्योहार पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया, जहाँ भक्तों ने नाग देवताओं की पूजा की। इस वर्ष उत्सव के साथ-साथ पवित्र उपवनों (नाग बनस) को प्लास्टिक मुक्त रखने का एक बड़ा अभियान भी चलाया गया।
- दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के प्रमुख नाग क्षेत्रों में भारी भीड़।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक-मुक्त पूजा का विशेष अभियान।
- कुक्के सुब्रमण्य और कुडुपु अनंतपद्मनाभ मंदिरों में विशेष अभिषेक।
कर्नाटक के तटीय जिलों, दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में सोमवार को नाग पंचमी का पर्व अत्यंत भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। यह त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हिंदू उत्सव सीजन और श्रावण मास की शुरुआत का भी संकेत देता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने नाग देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
इस वर्ष की सबसे खास बात पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया कदम था। सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने नाग बनस (पवित्र उपवनों) में प्लास्टिक सामग्री के उपयोग के खिलाफ एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। मंगलुरु नगर निगम (MCC) ने भी लोगों से अपील की कि वे एकल-उपयोग प्लास्टिक का त्याग कर इस पर्व को मनाएं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह प्रवृत्ति दिखाती है कि कैसे पारंपरिक धार्मिक प्रथाएं अब आधुनिक पर्यावरणीय चेतना के साथ मिल रही हैं। नाग बनस न केवल आध्यात्मिक केंद्र हैं, बल्कि वे भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) और जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं। प्लास्टिक का उपयोग इन संवेदनशील क्षेत्रों को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।
अंबा המשवरी सेवा ट्रस्ट, मंगलुरु ने इस संबंध में विशेष प्रयास किए। ट्रस्ट की तीन टीमों ने 9 अगस्त से 16 अगस्त तक मंगलदेवी, बोलारा और होईगबाजार वार्डों में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने प्रमुख नाग क्षेत्रों में हैंडबिल वितरित किए ताकि लोग प्लास्टिक के बजाय पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों का चयन करें।
"नाग पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के बीच के गहरे संबंध को पुनर्स्थापित करने का एक माध्यम है।"
धार्मिक गतिविधियों की बात करें तो कुक्के सुब्रमण्य मंदिर में दोपहर की महा पूजा के बाद मुख्य पुजारी सीताराम यदपदिथाय ने नाग मूर्ति का क्षीरभिषेक, पंचामृत अभिषेक और जल अभिषेक किया। भक्तों ने बड़ी संख्या में अशेलेषा बलि और नाग प्रतिष्ठा जैसे विशेष सेवों में भाग लिया।
मंगलुरु के पास कुडुपु अनंतपद्मनाभ मंदिर और उडुपी के श्री कृष्ण मठ परिसर में भी विशेष सजावट और अभिषेक किए गए। इसके अलावा, पुत्तूर के महतोभरा महालिंगेश्वर मंदिर और मंगलदेवी मंदिर में भी भारी भीड़ देखी गई, जहाँ श्रद्धालुओं ने 'नाग तम्बिला' और अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री अर्पित की।
प्रशासनिक स्तर पर, नाग पंचमी के महत्व को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिला प्रशासन ने शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और निजी फर्मों के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, जिससे परिवारों को सामूहिक रूप से पूजा करने का अवसर मिला।
Frequently Asked Questions
1. नाग पंचमी पर प्लास्टिक-मुक्त अभियान क्यों चलाया गया?
पवित्र उपवनों (नाग बनस) की पारिस्थितिकी को बचाने और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए यह अभियान चलाया गया।
2. दक्षिण भारत के कौन से प्रमुख मंदिर इस उत्सव के केंद्र रहे?
कुक्के सुब्रमण्य और कुडुपु अनंतपद्मनाभ मंदिर मुख्य आकर्षण रहे।