सावन मास की अंतिम एकादशी कल है, जिसे पापनाशिनी और पवित्रा एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस विशेष व्रत से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
- सावन मास की अंतिम एकादशी कल मनाई जाएगी, जो संतान सुख और मोक्ष के लिए अत्यंत फलदायी है।
- इस दिन भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है।
- व्रत के दौरान अन्न का सेवन और दान वर्जित है, जबकि तुलसी पत्र चढ़ाना अनिवार्य है।
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का आध्यात्मिक महत्व सर्वोपरि है। सावन के पवित्र महीने के शुक्ल पक्ष की अंतिम एकादशी कल मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने से साधक को जीवन के सभी भौतिक सुखों के साथ-साथ अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुत्रदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के मुख्य पंडित विजय शास्त्री के अनुसार, सावन की इस एकादशी का पालन करने से साधक को विशेष कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से 'पुत्रदा एकादशी' के रूप में पूजी जाने वाली इस तिथि का महत्व उन दंपत्तियों के लिए अत्यधिक है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। पुराणों में उल्लेख है कि इस व्रत से न केवल उत्तम संतान की प्राप्ति होती है, बल्कि व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
इस एकादशी का व्रत करने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
विद्वानों द्वारा गणना की गई तिथियों के अनुसार, एकादशी का प्रारंभ 22 अगस्त को रात्रि 2:01 बजे से होगा और इसका समापन 23-24 अगस्त की मध्यरात्रि 4:19 बजे होगा। चूंकि सूर्योदय 23 अगस्त को होगा, इसलिए एकादशी का व्रत रविवार को ही रखा जाएगा। इस दिन को पापनाशिनी और पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है।
क्यों करें विशेष पूजा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि धार्मिक अनुष्ठानों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी गहरा होता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ महालक्ष्मी का अभिषेक करना और तुलसी पत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साधकों को इस दिन 'ॐ विष्णवे नम:' मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए। एक महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि इस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही किसी को अन्न का दान देना चाहिए।
ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि
एकादशी का व्रत सनातन धर्म में शुद्धि का प्रतीक माना गया है। सावन का महीना स्वयं महादेव को समर्पित है, और जब इस महीने में विष्णु जी की एकादशी आती है, तो यह शिव और शक्ति के समन्वय का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।
Frequently Asked Questions
1. सावन की इस एकादशी का क्या नाम है?
इसे पापनाशिनी, पवित्रा और पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
2. इस व्रत में क्या वर्जित है?
इस दिन अन्न का सेवन करना और अन्न का दान करना दोनों ही वर्जित हैं।