चीन की जुड़वां बहनों, जिन यानशु और जिन यनाई ने बीजिंग में अपना भरतनाट्यम अरंगेत्रम (अभिन्यास) सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती मिली है।

  • चीनी जुड़वां बहनें जिन यानशु और जिन यनाई ने बीजिंग में भरतनाट्यम का अपना औपचारिक प्रदर्शन (Arangetram) किया।
  • भारतीय राजदूत विक्रम डोराईस्वामी ने कार्यक्रम में शिरकत की और नर्तकियों के समर्पण की प्रशंसा की।
  • ये बहनें 3 साल की उम्र से ही गुरु जिन शान शान के मार्गदर्शन में इस कला को सीख रही हैं।
  • यह कार्यक्रम भारत और चीन के बीच गहरे सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों का प्रतीक बना।

बीजिंग के एक भरे हुए सभागार में शनिवार को एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक दृश्य देखने को मिला, जब 16 वर्षीय चीनी जुड़वां बहनों, जिन यानशु और जिन यनाई ने अपना भरतनाट्यम 'अरंगेत्रम' प्रस्तुत किया। अरंगेत्रम, जिसे भरतनाट्यम में एक नर्तक की औपचारिक मंच यात्रा की शुरुआत माना जाता है, ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, बल्कि भारत और चीन के बीच कलात्मक सेतु का भी काम किया।

इस गरिमामयी समारोह की अध्यक्षता भारत के चीनी राजदूत विक्रम डोराईस्वामी और उनकी पत्नी संगीता डोराईस्वामी ने की। राजदूत डोराईस्वामी ने नर्तकियों के कठिन परिश्रम और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनके जुनून की सराहना करते हुए कहा कि यह देखना वास्तव में सराहनीय है कि कैसे दो युवा चीनी कलाकार पूरे उत्साह के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य में खुद को समर्पित कर रहे हैं।

सांस्कृतिक संबंधों का गहरा होता स्वरूप

डोराईस्वामी ने इस बात पर जोर दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि भरतनाट्यम के मुद्राओं, संगीत और लय का गहरा अध्ययन करना चीनी युवाओं के लिए भारत और उसकी संस्कृति को समझने का एक माध्यम बन गया है। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों में 'सॉफ्ट पावर' के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भरतनाट्यम केवल एक नृत्य नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा और उसकी समृद्ध विरासत का प्रतिबिंब है जो सीमाओं को लांघकर दिलों को जोड़ता है।

इन जुड़वां बहनों का प्रशिक्षण काफी लंबा और कठिन रहा है। उन्होंने मात्र तीन वर्ष की आयु से ही प्रसिद्ध चीनी भरतनाट्यम विशेषज्ञ और शिक्षक जिन शान शान के संरक्षण में नृत्य सीखना शुरू किया था। जिन शान शान, प्रसिद्ध नर्तकी लीला सैमसन की शिष्या हैं और उन्होंने चेन्नई के प्रतिष्ठित कलाक्षेत्र संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व

बीजिंग स्थित 'संगीतम इंडियन आर्ट्स स्कूल', जिसकी स्थापना 2006 में हुई थी, भारत की इस कला को चीन में फैलाने का केंद्र बना हुआ है। गुरु जिन शान शान के अनुसार, चीन के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों बच्चे इस स्कूल में भारतीय शास्त्रीय नृत्य सीख रहे हैं। यह अरंगेत्रम पिछले कुछ वर्षों में इस स्कूल से होने वाला चौथा प्रमुख प्रदर्शन है।

जिन यानशु और जिन यनाई पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। उन्होंने 2025 में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में प्रदर्शन किया था। इसके अलावा, पिछले वर्ष बीजिंग में मंचित 'रामायण' नृत्य नाटिका में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही थी।

Did You Know?: 'अरंगेत्रम' शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'मंच पर आरोहण', जो एक नर्तक की पूर्ण प्रशिक्षण के बाद पहली सार्वजनिक प्रस्तुति को दर्शाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अरंगेत्रम क्या है?
उत्तर: अरंगेत्रम भरतनाट्यम सीखने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो नर्तक की पहली औपचारिक सार्वजनिक प्रस्तुति को दर्शाता है।

प्रश्न 2: इन बहनों को किसने प्रशिक्षित किया है?
उत्तर: इन्हें बीजिंग के संगीतम इंडियन आर्ट्स स्कूल की गुरु जिन शान शान ने प्रशिक्षित किया है।