तमिलनाडु का HR&CE विभाग आगमिक मंदिरों की पहचान के लिए विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई सूची पर श्रद्धालुओं से सुझाव और आपत्तियां मांग रहा है। यह कदम पुजारियों की नियुक्ति से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उठाया गया है।
- HR&CE विभाग ने 34,971 आगमिक मंदिरों की सूची तैयार की है।
- श्रद्धालु 30 दिनों के भीतर सुधार या नए नाम जोड़ने के लिए सुझाव दे सकते हैं।
- यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद शुरू की गई है।
तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के आगमिक मंदिरों की पहचान करने के लिए श्रद्धालुओं से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। विभाग ने एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार की गई सूची जारी की है और भक्तों से अनुरोध किया है कि वे इस सूची की समीक्षा करें और यदि किसी मंदिर को शामिल करने या सुधारने की आवश्यकता है, तो अपने विचार प्रस्तुत करें।
यह पूरी कवायद पुजारियों (Archakas) की नियुक्ति से संबंधित एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले के जवाब में की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट और मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, राज्य सरकार ने 6 अक्टूबर 2025 को एक सरकारी आदेश (G.O.) के माध्यम से एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। अदालत का निर्देश है कि एक बार आगमिक मंदिरों की पहचान पूरी हो जाने के बाद, गैर-आगमिक मंदिरों में रिक्त पदों को भरा जा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक भी है। मंदिरों के वर्गीकरण से न केवल पूजा पद्धतियों की शुद्धता बनी रहेगी, बल्कि यह पुजारियों की नियुक्ति की कानूनी जटिलताओं को भी सुलझाएगा, जिससे धार्मिक परंपराओं और आधुनिक कानून के बीच संतुलन स्थापित होगा।
मंदिरों का सही वर्गीकरण सदियों पुरानी परंपराओं और कानूनी ढांचे के बीच एक सेतु का काम करेगा।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, HR&CE के अधिकार क्षेत्र में कुल 46,341 संस्थाएं हैं। इनमें 43,676 मंदिर, 45 मठ, 80 मठों से जुड़े मंदिर, 1,216 विशिष्ट बंदोबस्ती, 1,301 धर्मार्थ बंदोबस्ती और 23 जैन मंदिर शामिल हैं। वर्तमान में विशेषज्ञ समिति ने 34,971 मंदिरों को आगमिक श्रेणी के तहत सूचीबद्ध किया है।
ऐतिहासिक संदर्भ
दक्षिण भारत में 'आगम' शास्त्र मंदिर निर्माण और पूजा पद्धति के प्राचीन नियम हैं। इन नियमों का पालन करने वाले मंदिरों को 'आगमिक मंदिर' कहा जाता है। इन मंदिरों में अनुष्ठान और पुजारियों की नियुक्ति के लिए विशिष्ट परंपराओं का पालन करना अनिवार्य होता है, जो अक्सर कानूनी विवादों का केंद्र बन जाते हैं।
श्रद्धालु अपनी प्रतिक्रिया 30 दिनों की अवधि के भीतर दे सकते हैं। इसके लिए वे या तो सीधे HR&CE आयुक्त के कार्यालय में जा सकते हैं या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विवरण अपलोड कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मैं मंदिर की सूची में सुधार के लिए कैसे आवेदन कर सकता हूँ?
उत्तर: आप HR&CE विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं या व्यक्तिगत रूप से आयुक्त के कार्यालय में जा सकते हैं।
प्रश्न 2: प्रतिक्रिया देने के लिए समय सीमा क्या है?
उत्तर: सूची जारी होने के बाद श्रद्धालुओं के पास सुझाव देने के लिए 30 दिनों का समय है।