पुडुचेरी के प्रतिष्ठित फ्रांसीसी काल के पुलिस मुख्यालय के संरक्षण का कार्य शुरू हो गया है। ₹8.73 करोड़ की लागत से होने वाला यह जीर्णोद्धार इस ऐतिहासिक संरचना को उसकी पुरानी भव्यता वापस दिलाएगा।

  • पुडुचेरी पुलिस मुख्यालय के जीर्णोद्धार के लिए ₹8.73 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
  • यह इमारत 1790 के दशक की है और फ्रांसीसी काल की सबसे पुरानी सैन्य संरचनाओं में से एक है।
  • INTACH और पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (PTU) संरक्षण के लिए तकनीकी परामर्श दे रहे हैं।
  • मूल फ्रांसीसी वास्तुकला और 'मद्रास टेरेस' छत शैली को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा।

पुडुचेरी के ड्यूमास स्ट्रीट पर स्थित प्रतिष्ठित Grade II B विरासत पुलिस मुख्यालय के बहुप्रतीक्षित जीर्णोद्धार कार्य की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। वर्षों की उपेक्षा और संरचनात्मक क्षति के बाद, पुडुचेरी लोक निर्माण विभाग (PWD) इस ऐतिहासिक परिसर को पुनर्जीवित करने के लिए ₹8.73 करोड़ का निवेश कर रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इमारत के मूल फ्रांसीसी स्थापत्य डिजाइन को बिना किसी बदलाव के सुरक्षित रखना है।

ऐतिहासिक महत्व और विकास

यह परिसर केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं है, बल्कि भारत के औपनिवेशिक इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है। इसका विकास तीन चरणों में हुआ था। मूल रूप से, मुख्य भवन का निर्माण 1788 और 1790 के बीच तीसरी फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के गोदाम के रूप में किया गया था। 1821 में स्थानीय सरकार ने इसे खरीदा, और 1857 में इसे सैन्य विभाग द्वारा बैरक के रूप में उपयोग किया जाने लगा। यह उपमहाद्वीप में फ्रांसीसी काल की सबसे पुरानी सैन्य इमारतों में से एक मानी जाती है।

वर्तमान में, इस परिसर में पुलिस महानिदेशक (DGP) का कार्यालय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) का कार्यालय शामिल है। जबकि दक्षिणी भाग का नवीनीकरण पहले ही किया जा चुका है और वहां पुलिस संग्रहालय स्थित है, उत्तरी भाग गंभीर संरचनात्मक संकट और वनस्पतियों के अत्यधिक विकास के कारण लंबे समय से खाली पड़ा था।

संरक्षण की जटिल चुनौतियां

संरक्षणवादियों ने वर्षों से इस इमारत की जर्जर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया था। विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित वनस्पतियों के कारण दीवारों में गहरी दरारें आ गई थीं और पानी का रिसाव (seepage) हो रहा था, जिससे नींव के कमजोर होने का खतरा पैदा हो गया था। छत पर लकड़ी के शहतीर की जगह स्टील और कंक्रीट के उपयोग ने भी संरचनात्मक क्षति को बढ़ावा दिया था।

विरासत का संरक्षण केवल मरम्मत नहीं है, बल्कि उस काल की आत्मा और वास्तुकला की शुद्धता को बचाए रखना है।

तकनीकी दृष्टिकोण और कार्य योजना

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग और पारंपरिक कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। INTACH (भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए राष्ट्रीय ट्रस्ट) वास्तुकला सलाहकार के रूप में कार्य कर रहा है, जबकि पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (PTU) संरचनात्मक सलाहकार है।

कार्य योजना के तहत, छतों और दीवारों की प्लास्टरिंग, लकड़ी के शहतीरों का प्रतिस्थापन और 'मद्रास टेरेस' छत शैली की बहाली शामिल है। फर्श के लिए कोटा स्टोन और छतों के लिए चूना कंक्रीट (lime concrete) का उपयोग किया जाएगा ताकि ऐतिहासिक प्रामाणिकता बनी रहे।

Did You Know?: यह इमारत मूल रूप से 18वीं शताब्दी के अंत में एक फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के गोदाम के रूप में बनाई गई थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस जीर्णोद्धार परियोजना की कुल लागत क्या है?
उत्तर: इस परियोजना के लिए ₹8.73 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।

प्रश्न 2: कौन सी संस्थाएं इस संरक्षण कार्य की देखरेख कर रही हैं?
उत्तर: INTACH वास्तुकला सलाहकार है और PTU संरचनात्मक सलाहकार के रूप में कार्य कर रहा है।