अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान की चोरी के आरोपों के बाद प्रशासनिक सुधार के तहत तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है। IIT और बैंकों के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है ताकि दान की गिनती में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित की जा सके।
- दान की चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए तकनीक का उपयोग करेगा।
- IIT और दो प्रमुख बैंकों ने कैश काउंटिंग के लिए तकनीकी समाधान प्रस्तावित किए हैं।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर की कुल उपलब्ध निधि 1,882 करोड़ रुपये रही।
- सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच में स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट की नियुक्ति का निर्देश दिया है।
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। हाल ही में मंदिर में दान की कथित चोरी के मामले ने सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस संकट के जवाब में, ट्रस्ट अब दान की गिनती की प्रक्रिया को पूरी तरह से तकनीक-आधारित बनाने की योजना बना रहा है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम किया जा सके।
बुधवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में, ट्रस्ट के सदस्यों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और दो प्रमुख बैंकों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य मंदिर में आने वाले भारी मात्रा में नकद चढ़ावे की गिनती को अधिक पारदर्शी, सटीक और कुशल बनाना है। ट्रस्ट के एक अधिकारी ने बताया कि इन तकनीकी प्रस्तावों का गहन परीक्षण किया जाएगा और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि राम मंदिर जैसे वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान के लिए वित्तीय पारदर्शिता केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि जन विश्वास बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। तकनीक का समावेश न केवल चोरी की संभावना को कम करेगा, बल्कि बढ़ते चढ़ावे के प्रबंधन को भी सुव्यवस्थित करेगा।
तकनीक का समावेश धार्मिक संस्थानों में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
गौरतलब है कि इस कदम के पीछे का मुख्य कारण हालिया 'डोनेशन स्कैंडल' है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में उन खामियों को उजागर किया गया था, जिनके कारण कर्मचारियों द्वारा नकदी और कीमती सामान की चोरी की गई। अब तक अयोध्या पुलिस इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें काउंटिंग एजेंट और बैंक कर्मचारी शामिल हैं।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से, ट्रस्ट ने पहले ही कई कड़े कदम उठाए हैं, जैसे काउंटिंग एजेंटों के लिए जेब रहित गाउन, समर्पित चेंजिंग एरिया और सख्त सीसीटीवी निगरानी। अब तकनीक के आने से यह सुरक्षा घेरा और मजबूत हो जाएगा।
वित्तीय स्थिति का विवरण (2025-26)
ट्रस्ट ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने वार्षिक खातों को भी मंजूरी दी। आंकड़ों के अनुसार, मंदिर की स्थिति इस प्रकार है:
| विवरण | राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| कुल आय | ₹237 करोड़ |
| कुल व्यय (संचालन) | ₹99 करोड़ |
| निर्माण एवं अन्य कार्य | ₹425 करोड़ |
| कुल उपलब्ध निधि (31 मार्च 2026 तक) | ₹1,882 करोड़ |
इसके साथ ही, ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को SIT जांच में एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। ट्रस्ट का मानना है कि इससे सत्य सामने आएगा और जनता के बीच व्याप्त भ्रम दूर होगा।
Frequently Asked Questions
1. ट्रस्ट तकनीक क्यों अपना रहा है?
दान की चोरी की घटनाओं को रोकने और गिनती की प्रक्रिया में मानवीय त्रुटि या धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए तकनीक अपनाई जा रही है।
2. SIT जांच में क्या शामिल है?
SIT जांच में दान की चोरी से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है, जिसमें अब फॉरेंसिक ऑडिट भी शामिल होगा।