ऑल इंडिया जमीयतुल उलेमा के महासचिव कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलीयार ने कहा कि धार्मिक विद्वानों को आस्था के विषयों पर बोलने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने केरल में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक विकास में विद्वानों की भूमिका पर जोर दिया।

  • धार्मिक विद्वानों को आस्था पर बोलने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
  • समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के शताब्दी समारोह के लिए स्वागत समिति का गठन किया गया।
  • विद्वानों ने केरल में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • शताब्दी सम्मेलन जनवरी 2027 में कूरियड में आयोजित किया जाएगा।

केरल के मालाप्पुरम जिले के चेम्माड में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, ऑल इंडिया जमीयतुल उलेमा के महासचिव कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलीयार ने एक शक्तिशाली बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो विद्वान गहन अध्ययन और ज्ञान के आधार पर धर्म के विषयों पर बोलते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की बाहरी रोक-टोक या सेंसरशिप का सामना नहीं करना चाहिए।

यह बयान हाल ही में सार्वजनिक स्थानों पर मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी से संबंधित उनके पिछले बयानों की आलोचना के जवाब में आया है। मुसलीयार ने तर्क दिया कि धार्मिक ज्ञान प्राप्त करने के बाद, एक विद्वान को धर्म पर व्याख्या करने का अधिकार स्वतः प्राप्त हो जाता है और इसके लिए उसे किसी संस्था या व्यक्ति की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है।

विद्वानों का ऐतिहासिक योगदान

कांथापुरम ने इस बात पर जोर दिया कि समस्त केरल जमीयतुल उलेमा ने न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया है, बल्कि केरल के मुसलमानों के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक उत्थान में भी आधारशिला रखी है। उन्होंने मदरसा नेटवर्क और आधुनिक शैक्षिक संस्थानों की स्थापना की सराहना की, जो धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष दोनों प्रकार की शिक्षा प्रदान करते हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इतिहास से विद्वानों के योगदान को मिटाने या उन्हें कमतर आंकने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्वानों ने हमेशा समुदाय को विभाजनकारी भावनाओं से दूर रखकर मध्यम मार्ग पर चलने का निर्देश दिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कांथापुरम का यह बयान धार्मिक स्वायत्तता और पहचान के संरक्षण के बीच के जटिल संबंध को रेखांकित करता है। केरल जैसे विविध राज्य में, धार्मिक विद्वानों की भूमिका केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता और सामुदायिक नेतृत्व के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

धार्मिक विद्वानों को आस्था के मामलों पर बोलने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते वे ज्ञान पर आधारित हों।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के शताब्दी समारोह की तैयारियों के लिए एक स्वागत समिति का गठन करना था। इस अवसर पर समस्ता के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलीयार सहित कई प्रमुख विद्वान उपस्थित थे।

Did You Know?: समस्त केरल जमीयतुल उलेमा केरल के मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख धार्मिक और सामाजिक संगठन है, जो दशकों से शिक्षा और नैतिकता का प्रसार कर रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलीयार कौन हैं?
उत्तर: वे ऑल इंडिया जमीयतुल उलेमा के महासचिव और एक प्रमुख धार्मिक विद्वान हैं।

प्रश्न 2: समस्ता शताब्दी सम्मेलन कब आयोजित होगा?
उत्तर: यह सम्मेलन 28, 29 और 30 जनवरी, 2027 को कूरियड में आयोजित किया जाएगा।